जंतर-मंतर से संसद तक बवाल, दिल्ली पुलिस को सड़क के साथ सोशल मीडिया पर भी लड़नी पड़ी जंग; पढ़ें Inside Story
दिल्ली पुलिस को सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ा। उन्हें ...और पढ़ें

दिल्ली पुलिस ने सीजेपी आंदोलन पर सड़क से सोशल मीडिया तक हर पल रखी नजर।
HighLights
सीजेपी का प्रदर्शन जंतर-मंतर से संसद तक, पुलिस ने संभाला।
दिल्ली पुलिस ने सड़क पर भीड़ और सोशल मीडिया अफवाहें संभाली।
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने से आंदोलन ने राजनीतिक रंग लिया।
नीरज तिवारी, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया से जन्मे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के अनशन-प्रदर्शन ने सोमवार को अराजक रूप ले लिया। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने समय रहते उग्र होती भीड़ को नियंत्रित कर हालात संभाल लिए।
इस बीच सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों की कथित बर्बरता से जुड़े कई भ्रामक और अफवाहपूर्ण पोस्ट भी तेजी से वायरल होते रहे, जो पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए। राजधानी की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों से निपटने के साथ-साथ पुलिस को सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों का जवाब देने में भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
इस पूरे माहौल के बीच दिल्ली के पुलिस कमिश्नर, गृह सचिव और आईबी प्रमुख के बीच कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की समीक्षा को लेकर उच्च स्तरीय बैठकें भी हुई हैं।
संसद मार्ग और जनपथ पर पुलिस पर पथराव
प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़कर संसद की तरफ बढ़े तो वहां क्लैश और पत्थरबाजी हुई। इस दौरान एक सब इंस्पेक्टर भी घायल हो गए। इस बीच जनपथ, संसद मार्ग और रायसीना रोड पर भीड़ उमड़ी रही। आसपास के इलाके प्रभावित हुए। ट्रैफिक पूरी तरह बाधित हो गया। जनपथ पर प्रदर्शनकारियों ने जमकर पथराव किया।

उग्र भीड़ को शांत करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। जिद पर आमादा भीड़ पर लाठीचार्ज तक करना पड़ा। इस पूरी कवायद में कई पुलिस वाले और प्रदर्शनकारी घायल हो गए। वहीं, प्रदर्शनकारी जमकर पुलिस और सरकार के खिलाफ नारीबाजी करते रहे। उधर, सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास कथित प्रदर्शनकारियों के घायलों के बारे में एक्स पर पोस्ट करते रहे, जिन्हें दिल्ली पुलिस ने जांच के बाद नकारते हुए अफवाह बताया।

दिनभर बदलता रहा आंदोलन का स्वरूप
नीट परीक्षा 2026 के पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ सीजेपी का आंदोलन समय के साथ राजनीतिक रंग लेने लगा। शुरुआत में इसे छात्रों का आंदोलन बताया गया, लेकिन धीरे-धीरे विभिन्न राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों की इसमें सक्रिय भागीदारी बढ़ती गई। इसी दौरान जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर पर चल रहा अनशन उनकी बिगड़ती सेहत पर भारी पड़ने लगा।

केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस लगातार आंदोलन के बदलते स्वरूप पर नजर बनाए हुए थीं। 18 जुलाई की सुबह पुलिस ने पूर्व नियोजित योजना के तहत सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया।

सोशल मीडिया पर बढ़ी बयानबाजी
इस कार्रवाई की राजनीतिक दलों और आंदोलन से जुड़े नेताओं ने तीखी आलोचना की। उन्होंने सरकार पर आंदोलन को कमजोर करने के लिए षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति का हवाला दिया और सरकार की कार्रवाई को उचित माना।
उधर, जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज होती गई। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, 20 जुलाई को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए।

संसद की ओर बढ़ती भीड़ पर करना पड़ा बल प्रयोग
देखते ही देखते नारेबाजी तेज हो गई और भीड़ उग्र होने लगी। शुरुआत में पुलिस ने बल प्रयोग से बचते हुए प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने से रोकने का प्रयास किया, लेकिन दोपहर तक हालात लगातार बिगड़ते गए।
इस दौरान पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की घटनाएं भी सामने आईं। संसद परिसर और वहां मौजूद सांसदों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस को आखिरकार सख्ती करनी पड़ी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज, पानी की तेज बौछार और आंसू गैस के गोले छोड़े गए।

सड़क शांत हुई तो सोशल मीडिया बना नई चुनौती
पुलिस कार्रवाई के बाद भीड़ में शामिल कुछ उपद्रवियों ने तोड़फोड़ शुरू कर दी। हालांकि, पुलिस ने समय रहते उन्हें खदेड़ दिया और संसद परिसर के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। हालांकि, छिटपुट हिंसा की खबरें अब भी सामने आ रही हैं, जिन पर पुलिस कार्रवाई कर रही है।
केंद्र सरकार की ओर से भी बातचीत का माहौल बनाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। उमस भरी गर्मी के बीच सड़क पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को दिनभर कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
सीजेपी प्रवक्ता के पोस्ट पर लगातार पुलिस देती रही 'सफाई'

इस बीच सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने एक्स पर लिखा कि अभिजीत दीपके को पुलिस ने जंतर-मंतर के मंच से उठा लिया है। उन्होंने पोस्ट में अपील की कि सभी सांसद इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराएं। हालांकि, पुलिस ने इसे झूठ बताया।
बाद में सौरव ने भी पोस्ट की सच्चाई बताई। वहीं, एक 12 साल की लड़की गीतांजलि के बारे में सौरव ने लिखा कि पुलिस ने लड़की के बाल पकड़कर पीटा है। इससे लड़की के सिर से खून बह रहा है। मगर पुलिस ने बिना किसी देरी के इस आरोप को भी निराधार बताया। वहीं, दिल्ली की अहम सड़कों पर पत्थरबाजी की बात को भी सौरव नकारते रहे जबकि उसके वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होते रहे।

नेपाल के 'जेनजी आंदोलन' का दिया गया हवाला
सड़क पर जारी हंगामे के साथ सोशल मीडिया पर भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। कई सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स ने पोस्ट साझा कर छात्र-छात्राओं के साथ कथित बदसलूकी के आरोप लगाए। इन पोस्टों पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं।
हालांकि, दिल्ली पुलिस का सोशल मीडिया सेल ऐसे कई दावों की त्वरित तथ्यपरक जांच कर उन्हें भ्रामक बताते हुए खंडन करता रहा। कुछ पोस्टों में नेपाल के बहुचर्चित 'जेनजी आंदोलन' का हवाला देकर लोगों से आंदोलन का समर्थन करने की अपील भी की गई।
पुलिस के अनुसार, उसे ऐसे इनपुट मिले हैं जिनसे संकेत मिलता है कि कुछ सोशल मीडिया पोस्टों में नेपाल की तर्ज पर भारत में भी कानून हाथ में लेने के लिए लोगों को उकसाने का प्रयास किया गया।

आने वाले दिनों में क्या होगी आंदोलन की दिशा?
कुल मिलाकर, सोमवार को दिल्ली पुलिस को एक साथ दो मोर्चों पर सक्रिय रहना पड़ा। दिल्ली पुलिस को एक ओर सड़कों पर उग्र प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करना और दूसरी ओर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं का तत्काल जवाब देना पड़ा। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।
दिल्ली पुलिस ने की अफवाहों से दूर रहने की अपील
वहीं, दिल्ली पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने और शांति व कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करने कीअपील की है। सभी प्रदर्शनकारियों से अनुरोध है कि वे शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करें। किसी भी गैर-कानूनी या हिंसक गतिविधि में शामिल न हों और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा दिए गए कानूनी निर्देशों का पालन करें। जनता को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अफवाहों, गलत जानकारी या अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें और न ही उन्हें फैलाएं।
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