बच्चों को एयर प्यूरिफायर से लैस कर स्कूल भेज रहे पैरेंट्स, दिल्ली के AQI ने दीपावली से पहले ही सबको डराया
दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण अभिभावक अपने बच्चों को एयर प्यूरीफायर के साथ स्कूल भेज रहे हैं, क्योंकि स्कूल प्रबंधन ठोस कदम नहीं उठा रहा है।

बच्चों को एयर प्यूरिफायर से लैस कर स्कूल भेज रहे पैरेंट्स (एआई जेनरेटेड इमेज )
HighLights
अभिभावक बच्चों को एयर प्यूरीफायर के साथ स्कूल भेजने को मजबूर।
स्कूल प्रबंधन पर प्रदूषण रोकथाम में निष्क्रियता का आरोप।
माता-पिता बच्चों के स्वास्थ्य और स्कूल की जिम्मेदारी पर चिंतित।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कोई भी अभिभावक अपने बच्चों की पढ़ाई से समझौता नहीं कर सकता। वह वायु प्रदूषण से प्रभावित हो रहे बच्चों की सेहत को देखकर भी डरा हुआ है।
ऐसे में कई माता-पिता अपने बच्चों को एयर प्यूरिफायर खरीदकर स्कूल भेज रहे हैं। इस बीच स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
कहां गए एयर प्यूरीफायर?
जब अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन से पूछा कि पिछले साल इस्तेमाल किए गए प्यूरीफायर कहां गए, तो बताया गया कि जैसे-जैसे छात्र अगली कक्षाओं में गए, वे उपकरण भी उनके साथ चले गए। इस वजह से छोटे बच्चों की कक्षाओं में अब ये उपकरण नहीं बचे हैं।
बच्चों को स्कूल भेजने से डर लग रहा
वहीं, कई पैरेंट्स का कहना है कि सर्दी के मौसम में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है और स्कूल प्रबंधन की ओर से इस पर अंकुश लगाने की दिशा में किसी भी प्रकार की व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में हमें अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डर लग रहा है।
बच्चों के माता-पिता का कहना है कि हमें इस बात का डर होता है कि अगर हम अपने बच्चों को स्कूल भेजेंगे, तो उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ सकता है। वैसे भी उनकी उम्र छोटी है। ऐसे में प्रदूषण का कहर उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
नहीं उठाया जा रहा कोई ठोस कदम
कई पैरेंट्स का कहना है कि हमने कई बार इस संबंध में स्कूल प्रशासन से कहा कि उन्हें प्रदूषण पर रोकथाम लगाने के लिए कोई ठोस कदम उठाना चाहिए, ताकि उन्हें अपने बच्चों को स्कूल भेजने में कोई दिक्कत नहीं हो। लेकिन, अफसोस की बात है कि स्कूल प्रबंधन की ओर से इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जाता है।
सारी बातें सिर्फ फाइलों तक ही सीमित रह जाती है, उसका धरातल पर कोई असर नहीं दिखता है और हम नहीं चाहते हैं कि इसका खामियाजा हमारे बच्चों को भुगतना पड़े।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पैरेंट्स दीपाली जैन बताती हैं कि उनके बच्चे ने हाल ही में स्कूल जाना शुरू किया है। ऐसे में हमेशा उन्हें इस बात की चिंता रहती है कि उनका बच्चा किस तरह के वातावरण में सांस ले रहा है। हमें अपने बच्चों के स्वास्थ्य की फिक्र है। लेकिन, यह दुर्भाग्य की बात है कि हम क्लासरूम में वायु गुणवत्ता की जांच नहीं कर सकते हैं।
उठाया जाना चाहिए ठोस कदम
उन्होंने बताया कि स्कूल प्रबंधन को इस बारे में पूरी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। हमारे बच्चों की सुरक्षा सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं होनी चाहिए कि पैरेंट्स एयर प्यूरीफायर के लिए पैसे दे सकते हैं की नहीं? यह हमारे बच्चों की सुरक्षा का मानक नहीं हो सकता है। अब समय आ चुका है कि इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाए।
स्कूल के आंतरिक संचार के अनुसार, इस प्रोजेक्ट पर लगभग 63.3 लाख रुपये का खर्च आया था, जिसमें प्रति छात्र लगभग 3,800 रुपये का एकमुश्त योगदान लिया गया था।
वसंत विहार स्थित टैगोर इंटरनेशनल स्कूल में नवंबर 2025 के एक सर्कुलर के जरिए अभिभावकों को बताया गया कि 85-90% अभिभावकों की सहमति मिलने के बाद हर क्लासरूम में दो एयर प्यूरीफायर लगाए जाएंगे।
स्कूल ने नर्सरी से लेकर 11वीं कक्षा तक के छात्रों (EWS छात्रों को छोड़कर) की दिसंबर की फीस में 600 रुपये का एकमुश्त शुल्क जोड़ने का प्रस्ताव रखा है।
बच्चों पर डाल दिया जाता है खर्च
उधर, विशेषज्ञों ने इस बात की भी चेतावनी दे दी है कि सिर्फ किसी कमरे के अंदर एयर प्यूरीफायर लगाने से प्रदूषणरहित हवा का होना सुनिश्चित नहीं कर सकते हैं।
एक यूजर ने कहा, "स्कूल हमेशा एयर प्यूरीफायर के खर्च का बोझ माता-पिता पर डाल देते हैं। वे विंटर कार्निवल आयोजित करने के लिए भी चंदा मांगते हैं। इतनी भारी-भरकम फीस लेने के बावजूद उनके पास जरूरी चीजों के लिए कभी फंड नहीं होता। असल में उनके लिए माता-पिता हमेशा एक 'ब्लैंक चेक' की तरह होते हैं।"
