दिल्ली में विभागों के बीच तालमेल बनना मुश्किल, समन्वय के लिए 'सेंट्रल कोऑर्डिनेशन अथॉरिटी' की उठी मांग
दिल्ली में विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय न होने की वजह से आम जनता को भारी परेशानी उठाना पड़ता ...और पढ़ें
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प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड
HighLights
दिल्ली में कई एजेंसियों से प्रशासनिक जटिलताएँ बढ़ती हैं।
समन्वय की कमी से जनता को दैनिक परेशानियाँ होती हैं।
एक एकीकृत 'सेंट्रल कोऑर्डिनेशन अथॉरिटी' आवश्यक है।
राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली एक ऐसा महानगर है जहां केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, नगर निगम, दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली पुलिस और नई दिल्ली नगर पालिका परिषद जैसी कई प्रशासनिक एजेंसियां एक साथ काम करती हैं।
इतनी सारी एजेंसियों की उपस्थिति के कारण प्रशासनिक संरचना बेहद जटिल हो जाती है। जब इन विभागों के बीच बेहतर समन्वय नहीं होता, तो इसका सीधा असर दिल्ली की आम जनता के दैनिक जीवन पर पड़ता है। इसलिए, दिल्ली वासियों को दैनिक परेशानियों से बचाने और शहर के सुचारू संचालन के लिए एजेंसियों के बीच तालमेल होना अत्यंत आवश्यक है।
क्यों होती है लोगों को परेशानी?
दिल्ली में यह आम समस्या है कि एक विभाग जैसे पीडब्ल्यूडी नई सड़क बनाता है और कुछ ही दिनों बाद दूसरा विभाग (जैसे जल बोर्ड या बिजली कंपनियां) पाइप या केबल बिछाने के लिए उसे खोद देता है। इससे लोगों की परेशानी बढ़ जाती है।
मानसून के समय नालों की सफाई और जलभराव से निपटने के लिए नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और एनडीएमसी को मिलकर काम करना पड़ता है। यदि सफाई समय पर साझा योजना बनाकर न हो, तो पूरी दिल्ली में भारी ट्रैफिक जाम और जलभराव की स्थिति बन जाती है।
दिल्ली के विकास के लिए समन्वय जरूरी
दिल्ली में वायु और जल प्रदूषण जैसी विकराल समस्याओं का समाधान केवल एक विभाग नहीं कर सकता। धूल नियंत्रण, कचरा प्रबंधन, और वाहनों के धुएं पर रोक लगाने के लिए पर्यावरण विभाग, यातायात पुलिस और स्थानीय निकायों का एक साथ मिलकर ठोस कदम उठाना जरूरी है।
पुलिस, एमसीडी और डीडीए के बीच समन्वय की कमी के कारण अवैध निर्माण और सड़कों पर अतिक्रमण बढ़ता है, जिससे आम नागरिकों की पैदल चलने और पार्किंग की जगह छिन जाती है।
सेंट्रल कोऑर्डिनेशन अथॉरिटी की डिमांड
दिल्ली के लिए एक अधिकार संपन्न 'सेंट्रल कोआर्डिनेशन अथॉरिटी' या एकीकृत कमांड सेंटर बनाया जाना चाहिए। यह संस्था सभी प्रमुख विभागों के सिविल कार्यों, मरम्मत और नई परियोजनाओं की निगरानी करे और उन्हें पूर्व-स्वीकृति दे।
एक साझा जीआइएस मैपिंग और डिजिटल पोर्टल विकसित किया जाए। किसी भी सड़क या बुनियादी ढांचे पर काम शुरू करने से पहले सभी संबंधित विभागों को इस पोर्टल पर अपनी योजना दर्ज करना अनिवार्य हो, ताकि काम एक साथ और तय समय-सीमा में पूरा किया जा सके।
कैसे दूर होगी दिल्ली की ये समस्या?
हर महीने विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारियों और प्रतिनिधियों की नियमित बैठकें आयोजित होनी चाहिए, विशेषकर मानसून पूर्व तैयारियों, सर्दियों में प्रदूषण की रोकथाम और आपातकालीन स्थितियों के लिए। आम जनता को अपनी समस्या दर्ज कराने के लिए अलग-अलग ऐप या पोर्टल पर न जाना पड़े।
'वन नेशन-वन ऐप' की तर्ज पर दिल्ली के लिए एक एकीकृत नागरिक शिकायत पोर्टल होना चाहिए, जो स्वचालित रूप से शिकायत को संबंधित विभाग को ट्रांसफर करे और उस पर हुई कार्रवाई की निगरानी करे।
अंतर-विभागीय देरी या तालमेल की कमी के कारण होने वाले नुकसान के लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। इसके साथ ही, किसी भी बड़ी नागरिक परियोजना का 'ज्वाइंट साइट ऑडिट' अनिवार्य किया जाना चाहिए।
दिल्ली में अंतर-विभागीय समन्वय जरूरी
दिल्ली को एक आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक वैश्विक शहर बनाने के लिए अंतर-विभागीय समन्वय केवल प्रशासनिक विकल्प नहीं, बल्कि प्राथमिक आवश्यकता है।
जब सभी सरकारी एजेंसियां अपने व्यक्तिगत प्रशासनिक दायरों से बाहर निकलकर साझा लक्ष्य और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ काम करेंगी, तभी दिल्ली की जनता को रोज़मर्रा की असुविधाओं से स्थायी राहत मिल सकेगी।
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