केंद्रीय बजट 2026 से दिल्ली के एमएसएमई की बढ़ेगी रफ्तार, उद्योग संगठनों ने स्वागत कर कहा-मिलेगा नया बल
केंद्रीय बजट 2026 दिल्ली के एमएसएमई क्षेत्र के लिए आशाजनक है। इसमें राष्ट्रीय व स्वावलंबी फंड से पूंजीगत सुदृढ़ता मिलेगी। ...और पढ़ें

केंद्रीय बजट ने स्पष्ट किया है कि आर्थिक प्रगति की धुरी विनिर्माण उद्योग व एमएसएमई ही हैं। यह बजट उसकी स्थिरता और दीर्घकालिक विकास के लिए है।

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नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। केंद्रीय बजट दिल्ली के उद्योग-धंधों के आशा अनुरूप है, जो टैरिफ वार से बदलने वर्ल्ड ऑर्डर में देश के एमएसएमई क्षेत्र को मजबूती देने वाला है। एमएसएमई के लिए राष्ट्रीय फंड व स्वावलंबी फंड के प्रविधान से दिल्ली के उद्योगों को भी बड़ी राहत तथा पूंजीगत सुदृढ़ता की उम्मीद है। केंद्रीय बजट ने स्पष्ट किया है कि आर्थिक प्रगति की धुरी विनिर्माण उद्योग व एमएसएमई ही हैं। यह बजट उसकी स्थिरता और दीर्घकालिक विकास के लिए है।
बजटीय प्रस्ताव का लाभ वास्तविक एमएसएमई तक पहुंचे
यह बजट कल पूर्जे तथा कच्चे माल के आयात शुल्क में कटौती का फायदा राष्ट्रीय राजधानी के उद्योगों के आधुनिकीकरण तथा लागत शुल्क कटौती में मदद करेगी। वह भी तब जब, वायु व जल प्रदूषण के मोर्चे पर उद्योग-धंधे आलोचनाओं के शिकार हैं। तब कल-पूर्जों में आयात शुल्क में कटौती का लाभ स्वच्छ उद्योग को प्रेरित करेगा। इसलिए दिल्ली के उद्योग संगठनों ने बजट की सराहना की है। साथ ही बजटीय प्रस्ताव का लाभ वास्तविक एमएसएमई तक पहुंचाने का आग्रह किया है।
"एमएसएमई विकास कोष की घोषणा से 10 हजार करोड़ रुपये की इक्विटी आधारित विस्तार पूंजी तथा स्वावलंबी भारत कोष में 2,000 करोड़ का अतिरिक्त प्रविधान नए निवेश व रोजगार सृजन के साथ मिश्रित वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। ऋण गारंटी न्यास योजना के तहत बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराना एमएसएमई क्षेत्र के लिए बड़ी राहत है।"
-डाॅ. अनिल गुप्ता, अध्यक्ष, दिल्ली मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन
"जेम और टी-रेड्स के एकीकरण से आर्डर से भुगतान तक पारदर्शी और तेज डिजिटल प्रक्रिया बनेगी। कारपोरेट मित्र पहल से अनुपालन लागत कम होगी और छोटे उद्योगों को सस्ती पेशेवर सहायता मिलेगी। 200 पुराने औद्योगिक क्लस्टरों के पुनर्जीवन की योजना से स्थानीय उद्योगों को नई ऊर्जा मिलेगी। दिल्ली में इसकी बड़ी संभावनाएं है। सेवा क्षेत्र में देखभाल अर्थव्यवस्था, चिकित्सा मूल्य पर्यटन, एवीजीसी (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कामिक्स), डिजाइन तथा पर्यटन जैसे क्षेत्रों में दिल्ली में नए अवसर खुलेंगे, जिससे रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।"
-विनीत जैन, महासचिव, दिल्ली मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन
"बजट में सरकार ने सूक्ष्म लघु उद्यमियों के लिए विकास निधि का प्रस्ताव रखा है। इसी तरह 200 औद्योगिक क्लस्टरों के विकास और उद्योग आधारित प्रशिक्षण प्रोग्राम समेत कई अन्य प्रस्ताव है, जो काफी बेहतर है। जरूरत है कि उसका लाभ उन अति सूक्ष्म उद्यमियों को मिले, जो एमएसएमई का अधिकांश भाग हैं। विलंबित भुगतान की समस्या से सूक्ष्म उद्यमियों को राहत देने के लिए दो वर्ष पूर्व के प्रविधान 43बी (एच) की विसंगतियों को दूर करने की अपेक्षा थी। उत्पादन लागत कम करने के लिए भूमि, बिजली और पानी के अधिकतम दामों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए था। व्यक्तिगत आयकर की समाप्ति की दिशा में प्रयास के लिए अभी और इंतजार करना होगा। रीसाइक्लिंग प्रोत्साहन नीति की भी आवश्यकता थी, जिसकी दिल्ली को अपेक्षा थी।"
-मुकेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष, एसपीएम औद्योगिक पार्क वेलफेयर एसोसिएशन
"यह दीर्घकालीन विकास के लिए बजट है। जीडीपी और निर्यात को बढ़ाने देने पर जोर है। जिसमें कपड़ा क्षेत्र में ध्यान रखा गया है। ऊर्जा के क्षेत्र में सोलर पैनल में छूट की व्यवस्था और बैट्री के दाम घटाने के प्रस्ताव से निश्चित रूप से सस्ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में सकारात्मक सहयोग मिलेगा। सरकार ने लोकलुभाव बजट की जगह देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया है। कर चोरी को दंड की जगह जुर्माने में तब्दील कर बड़ी राहत दी है।"
-सुरेश बिंदल, प्रधान, चांदनी चौक ट्रेडर्स परिषद
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