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आपके पुराने कपड़े बदलेंगे किसी की जिंदगी! दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर शुरू होने जा रही अनोखी मुहिम

Published: Tue, 14 Jul 2026 08:22 PM (IST)

दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर शीघ्र 'अर्पण' केंद्र खोले जाएंगे, जहां नागरिक अपने पुराने कपड़े दान कर सकेंगे।

दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर शीघ्र 'अर्पण' केंद्र खोले जाएंगे, जहां नागरिक अपने पुराने कपड़े दान कर सकेंगे। इमेज एआई

दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर शीघ्र 'अर्पण' केंद्र खोले जाएंगे, जहां नागरिक अपने पुराने कपड़े दान कर सकेंगे। इमेज एआई

HighLights

  1. 10 मेट्रो स्टेशनों पर 'अर्पण' केंद्र खुलेंगे।

  2. पुराने कपड़ों से उत्पाद बनाकर रोजगार मिलेगा।

  3. स्वयं सहायता समूह की महिलाएं केंद्र चलाएंगी।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली में 10मेट्रो स्टेशनों पर शीघ्र अर्पण केंद्र खोलने की तैयारी है। यहां पर आम नागरिक अपने पुराने व अनुपयोगी कपड़े दान कर सकेंगे। इन केंद्रों पर पुराने वस्त्र से तैयार उत्पादों की बिक्री भी की जाएगी। इससे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार मिलेगा। साथ ही लैंडफिल साइट पर जाने वाले कचरे में कमी आएगी।

पहले चरण में शाहदरा, डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल, मालवीय नगर, हौज खास, द्वारका, मोहन एस्टेट, लाजपत नगर, मयूर विहार फेज-1, पंजाबी बाग वेस्ट और शालीमार बाग मेट्रो स्टेशनों पर ‘अर्पण’ केंद्र शुरू किए जाएंगे।

इसके लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की उपस्थिति में दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) और डीएमआरसी लेडीज वेलफेयर आर्गनाइजेशन (डीएलडब्ल्यूओ) ने दिल्ली सरकार के राज्य शहरी आजीविका मिशन (एसयूएलएम) और टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग से जुड़ी संस्था ‘क्लोथ्स बाक्स फाउंडेशन’ और ‘रेस्पन’ के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक डॉ. विकास कुमार व संस्थाओं के पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

इन केंद्रो का संचालन एसयूएलएम से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं करेंगी। उन्हें वस्त्रों की अपसाइक्लिंग (पुराने, बेकार या अनुपयोगी कपड़ों को रचनात्मक तरीके से बदलकर उनसे अधिक सुंदर, उपयोगी और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाना) और रीसाइक्लिंग का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

पुराने कपड़े दान करने की प्रक्रिया

सुबह सात से शाम सात बजे तक मेट्रो स्टेशनों पर स्थापित अर्पण केंद्र जाकर वहां उपलब्ध क्यूआर कोड स्कैन कर एक संक्षिप्त डिजिटल फार्म जिसमें नाम, मोबाइल नंबर और दान किए जाने वाले कपड़ों का विवरण भरना होगा। उसके बाद स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाएं कपड़ों की जांच और सत्यापन करेंगी। उसके बाद डिजिटल प्रमाणपत्र और विशेष संदेश प्राप्त होगा। सभी अर्पण केंद्रों की आनलाइन रियल-टाइम ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जा सकेगी।

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