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दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन पर 'रियल-टाइम कोच ऑक्यूपेंसी' सुविधा शुरू, प्लेटफॉर्म पर मिलेगी कोच में भीड़ की जानकारी

Published: Fri, 30 Oct 2026 04:43 PM (IST)

दिल्ली मेट्रो ने पिंक लाइन पर 'रियल-टाइम कोच ऑक्यूपेंसी स्टेटस' सुविधा शुरू की है। यह सुविधा पहले केवल मैजेंटा लाइन पर ही थी।

दिल्ली मेट्रो के पिंक लाइन पर रियल-टाइम कोच ऑक्यूपेंसी। फोटो-जागरण

दिल्ली मेट्रो के पिंक लाइन पर रियल-टाइम कोच ऑक्यूपेंसी। फोटो-जागरण

HighLights

  1. पिंक लाइन पर रियल-टाइम कोच ऑक्यूपेंसी सुविधा शुरू।

  2. यात्रियों को भीड़ कम वाले कोच चुनने में मदद।

  3. कोचों में यात्रियों का भार बेहतर ढंग से बंटेगा।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो की ओर से पिंक लाइन को और ज्यादा सुचारु बनाने के लिए 'रियल-टाइम कोच ऑक्यूपेंसी स्टेटस' दिखाने की सुविधा शुरू की है। इससे पहले मैजेंटा लाइन पर कोच में यात्रियों की संख्या की जानकारी दी जाती थी।

मैजेंटा लाइन पर 'रियल-टाइम कोच ऑक्यूपेंसी' की जानकारी देने की सफल शुरुआत के बाद, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने अब पिंक लाइन के स्टेशनों पर भी हर कोच में यात्रियों की संख्या दिखाने की सुविधा शुरू कर दी है।

एक कोच पर नहीं बढ़ता यात्रियों का भार

मैजेंटा लाइन के प्लेटफॉर्म पर लगा 'पैसेंजर इंफॉर्मेशन डिस्प्ले सिस्टम'  2022 से ही हर कोच में यात्रियों की संख्या की रियल-टाइम जानकारी दिखा रहा है। इसकी मदद से यात्रियों को यह तय करने में आसानी होती है कि उन्हें किस कोच में चढ़ना चाहिए, और इससे सभी कोचों में यात्रियों का भार भी बेहतर तरीके से बंट जाता है।

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

DMRC ने अब पिंक लाइन पर भी यही सुविधा शुरू कर दी है। यह सिस्टम कोचों में लगे 'लोड सेंसर' का इस्तेमाल करता है, जो हर कोच के मौजूदा वजन को मापते हैं और उसकी तुलना कोच के खाली वजन से करते हैं।

इस डेटा के आधार पर, हर कोच में यात्रियों की संख्या का अनुमानित प्रतिशत निकाला जाता है। ट्रेन के आने से कुछ समय पहले, प्लेटफॉर्म पर लगी PIDS स्क्रीन पर यह जानकारी देने लगती है। लाइन-7 एक सर्कुलर लाइन है, इसलिए इसमें डेटा को आपस में जोड़ना काफी चुनौतीपूर्ण था।

'रियल-टाइम कोच ऑक्यूपेंसी' से यात्रियों का क्या फायदा?

सही कोच चुनने में मदद: यात्री पहले से ही पता लगा सकते हैं कि किस कोच में कम भीड़ है और प्लेटफॉर्म पर उसी तरफ जा सकते हैं। इससे उन्हें बहुत ज्यादा भीड़ वाले कोचों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ती।

यात्रियों के भार का बेहतर बंटवारा: इससे सभी कोचों में यात्रियों की संख्या संतुलित रहती है, जिससे सफर ज्यादा आरामदायक होता है और किसी एक कोच में बहुत ज्यादा भीड़ नहीं होती।

पीक आवर्स में बेहतर सफर: यह सुविधा सुबह और शाम के 'पीक आवर्स' में बहुत काम आती है, जब कुछ कोच बाकी कोचों की तुलना में जल्दी भर जाते हैं।

बेहतर सुरक्षा और कार्यक्षमता: ट्रेन में वजन का समान बंटवारा होने से ट्रेन का संचालन सुचारू रूप से होता है और उपलब्ध क्षमता का बेहतर इस्तेमाल हो पाता है।

समय की बचत और कम तनाव: यात्रियों को अब यह अंदाजा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती कि किस कोच में जगह होगी, और न ही ट्रेन आने के बाद जगह खोजने के लिए उन्हें पूरे प्लेटफॉर्म पर चलना पड़ता है।

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