अवैध निर्माण पर अधिकारियों की लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त, कठोर कदम उठा रहा है निगमः प्रवेश वाही
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही ने अवैध निर्माण और अधिकारियों की लापरवाही पर सख्त रुख ...और पढ़ें

अवैध निर्माण और अधिकारियों की लापरवाही पर एमसीडी का कड़ा रुख, महापौर ने दिए सख्त निर्देश।
HighLights
सत्य निकेतन हादसे के बाद अवैध निर्माण पर एमसीडी सख्त।
अधिकारियों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं, कठोर कार्रवाई के निर्देश।
असुरक्षित इमारतों का दोबारा निरीक्षण, मरम्मत या कार्रवाई होगी।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना में सात लोगों की मृत्यु के बाद राजधानी में अवैध रूप से चल रहे पीजी और अवैध निर्माण व जर्जर इमारतों पर समय से कार्रवाई न होने को लेकर नगर निगम की कार्यशैली पर प्रश्न चिह्न खड़े हो रहे हैं। हादसे के बाद एमसीडी ने असुरक्षित व अवैध इमारतों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू की है, साथ ही उपायुक्त स्तर के अधिकारी को निलंबित किया है।
इस तरह के कदम नियमित रूप से क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं? इसमें क्या गतिरोध है? हादसों के बाद भी कार्यशैली में अधिक बदलाव क्यों नहीं हो रहा है? इन्हीं प्रश्नों को लेकर दैनिक जागरण के निहाल सिंह ने दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही से विस्तृत बातचीत की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश...
प्रश्न: सत्य निकेतन हादसे में सात लोगों की मौत के बाद एमसीडी ने अवैध और खतरनाक भवनों के खिलाफ कार्रवाई तेज की है। क्या एमसीडी पहले कार्रवाई करती तो हादसा रोका जा सकता था?
प्रवेश वाही: देखिए, इस मामले में संवेदनशीलता के साथ काम करने और किसी भी स्तर पर कोताही नहीं बरतने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। खतरनाक भवनों का दोबारा निरीक्षण कराया जा रहा है। जो भवन खतरनाक पाए जा रहे हैं, उन पर कार्रवाई की जाएगी और जहां मरम्मत की जरूरत है, वहां भवन मालिकों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। अगर किसी स्तर पर लापरवाही या कोताही सामने आती है तो भवन मालिक के साथ संबंधित क्षेत्र के अधिकारी पर भी कार्रवाई होगी।हां यह बात स्वीकार करने में मुझे कोई गुरेज नहीं है कि अधिकारियों की शिथिलता भी कहीं न कहीं रही है। जिस पर पहली बार एमसीडी में जूनियर इंजीनियर से लेकर उपायुक्त को निलंबित कर दिया है। साथ ही एक अन्य मामले में लापरवाही सामने आने पर दो और अभियंताओं को निलंबित किया गया है।
प्रश्न: दिल्ली में अवैध निर्माण और अवैध कालोनी बसाने का सिलसिला लंबे समय से चला आ रहा है। निगम में भाजपा की सरकार होने के बावजूद इसकी जिम्मेदारी से आप कैसे बच सकते है?
प्रवेश वाही: सत्य निकेतन में गिरने वाला भवन 40-50 वर्ष पुराना था। रविवार की छुट्टी के दिन कोई इमारत के अंदर काम रहा है। ऐसे में एकदम से कैसे किसी को पता लग जाएगा। फिर भी हम अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच रहे। हमने इस मामले को गंभीरता से लिया है और कार्रवाई की है। दिल्ली में पिछले कई दशकों से अवैध निर्माण और अवैध कालोनियों का जाल फैला हुआ है। इसमें अलग-अलग समय की सरकारों और व्यवस्थाओं की भूमिका रही है। कई योजनाओं और कानूनी प्रविधानों के कारण भी कार्रवाई में अड़चन आती रही है।लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच सकते हैं। अधिकारियों की शिथिलता या लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
प्रश्न: एमसीडी में दूसरे विभागों से प्रतिनियुक्ति पर आने वाले अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। क्या आने वाले समय में इस व्यवस्था में बदलाव होगा?
प्रवेश वाही: यह गंभीर विषय है और इस पर विचार चल रहा है। निगम में अधिकारियों की कमी भी एक बड़ी समस्या है। जो नियम बने हुए हैं, उनके अनुसार बाहर से आने वाले अधिकारियों की संख्या को एक सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए, लेकिन इसमें भी काफी असमानता है। इसे ठीक करने के लिए उच्चस्तर पर विचार किया जा रहा है। संभव है कि जल्द कोई समाधान निकले।
प्रश्न: सत्य निकेतन हादसे के बाद एबीवीपी निगमायुक्त संजीव खिरवार के इस्तीफे की मांग कर रही है। क्या आपको लगता है कि उपायुक्त समेत अधिकारियों को निलंबित करना पर्याप्त कार्रवाई है?
प्रवेश वाही: एबीवीपी अपनी जगह अपनी बात रख रही है। युवा और छात्रों का प्रतिनिधित्व करने के कारण उन्हें अपनी मांग रखने का अधिकार है। लेकिन हमने भी इस मामले में पहले ही सख्त निर्णय ले लिया है। उपायुक्त, अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता,सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता पर कार्रवाई की गई। यह एक बड़ा फैसला है और बहुत से लोग इसे स्वीकार भी कर रहे हैं।
प्रश्न: कूचा महाजनी में 54 दुकानों की सीलिंग और पीजी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। व्यापारियों के नुकसान और राजनीतिक आरोपों के बीच निगम की कार्रवाई का आधार क्या होगा?
प्रवेश वाही: यह सही है कि किसी दुकान या भवन पर कार्रवाई होने से व्यापारी या मकान मालिक को नुकसान हो सकता है, लेकिन अवैध और असुरक्षित निर्माण के कारण होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए कार्रवाई जरूरी है। कूचा महाजनी जैसे इलाकों में बेसमेंट और छोटी-छोटी गलियों में बड़ी संख्या में लोगों का व्यापारिक गतिविधियों के लिए इकट्ठा होना भी सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है। हालांकि व्यापारियों को भी पर्याप्त समय मिलना चाहिए कि वे अपना कारोबार उचित स्थान पर स्थानांतरित कर सकें।
प्रश्न: भाजपा के विधायक अनिल शर्मा पर भी नियमों के खिलाफ जाकर पीजी संचालन के आरोप लग रहे हैं?
प्रवेश वाही: पीजी चलाना कोई अपराध नहीं है लेकिन पीजी नियमों , सुरक्षा इंतजामों को सुनिश्चित करके संचालित होना चाहिए। अगर कोई नियमों का उल्लंघन करता है समानरूप से कार्रवाई होती है। चाहे कोई किसी भी दल से संबंध क्यों न रखता हो। आम आदमी पार्टी को तो बोलेने का अधिकार ही नहीं है। आप के नेता चोरी और भ्रष्टाचार के मामलों में जेल की सजा काट चुके हैं। ऐसे लोगों को नैतिक अधिकार ही नहीं है ।
प्रश्न: दशहरा और दीपावली आने को है ऐसे में स्वच्छता से लेकर प्रकाश व्यवस्था को लेकर आपकी क्या तैयारी है?
प्रवेश वाही: हम बाजारों में अतिक्रमरोधी अभियान चला रहे हैं। साथ ही स्वच्छता के लिए जागरुकता के साथ ही सेेवा अभियान चल रहा है। ऐसे-ऐसे इलाकों की सफाई की जा रही है जो पहले सफाई से अछूते रह जाते थे। हम उन स्थानों पर भी लाइटिंग की व्यवस्था कर रहे हैं जहां प्रकाश की कमी है। बाजार स्वच्छ रहे और लोग सहूलियत से खरीददारी कर सके इसके इंतजाम किए जा रहे हैं।
