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दिल्ली में MCD का बड़ा कदम, लाखों स्ट्रीट लाइटें होंगी स्मार्ट; नई तकनीक से बचेगी बिजली

Published: Sun, 15 Mar 2026 05:30 AM (IST)

दिल्ली नगर निगम (MCD) ने छह और जोन में स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव और बदलने के लिए नई एजेंसी को ...और पढ़ें

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

निहाल सिंह, दिल्ली। दिल्ली नगर निगम इलाके में अब स्ट्रीट लाइटों के खराब होने पर उनके ठीक न होने की समस्या अब खत्म हो जाएगी। निगम ने पूरी एमसीडी इलाके में छह जोन में नई एजेंसी की तैनाती के बाद शेष छह जोन में भी नई एजेंसी की तैनाती की मंजूरी दे दी है।

शुक्रवार को हुई सदन की बैठक में इसे मंजूर किया गया। इसके तहत पूर्व कालिक उत्तरी निगम इलाके में आने वाले करोल बाग, सिविल लाइंस, सिटी एसपी जोन, नरेला, रोहिणी और केशवपुरम में नई एजेंसी 10 साल तक स्ट्रीट लाइटों का रखरखाव करेगी और चरणबद्ध तरीके से इन लाइटों को बदलेगी।

वहीं, खास बात यह है कि यह लाइटें जो लगेगी वह इंटेलिजेंट लाइटिंग मैनेजमेंट सिस्टम (आइएलएमएस) तकनीक से युक्त होगी।

महापौर राजा इकबाल सिंह ने बताया कि आइएलएमएस तकनीक से खराब स्ट्रीट लाइटों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा सकती है। वहीं, जो शिकायतें खराब स्ट्रीट लाइटों की आती है, उनको कम से कम समय में समाधान के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।

वहीं, अगर किसी मार्ग से कोई नहीं गुजर रहा है तो स्ट्रीट लाइट की रोशनी भी स्वतः कम होने लगती है और ज्यादा देर तक यही स्थिति होने पर लाइट बंद भी हो जाती है। वहीं, इसमें लगे सेंसर किसी व्यक्ति, वाहन या जानवर के गुजरने पर स्वतः जल जाती है।

महारपौर ने कहा कि इससे ऊर्जा की बचत भी होती है। जिसका लाभ एमसीडी को बिजली के बिल के भुगतान में बचत होने से होगा।

छह जोन में 3.12 लाख स्ट्रीट लाइटें

राजा इकबाल सिंह के अनुसार, उपरोक्त छह जोन में 3.12 लाख स्ट्रीट लाइटें हैं। इनमें से ज्यादातर स्ट्रीट लाइटों को 2012 और 2022 के बीच हाई-प्रेशर सोडियम वेपर (एचपीएसवी) लैंप से एलईडी में बदला गया था। चूंकि यह लाइटें अब अपनी समय-सीमा पूरी कर रही है इसलिए सबसे पुरानी लाइटें फिर उसके बाद की लाइटों को चरणबद्ध तरीके से अगले 10 वर्ष तक बदला जाएगा।

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इन लाइटों को बदलने के साथ ही इनके संचालन के लिए आइएलएमएस तकनीक लगी होगी। जिसमें एक सेंट्रल कंट्रोल रूम से दूर से निगरानी और नियंत्रण किया जा सकेगा।यह सिस्टम दिन की रोशनी की उपलब्धता के आधार पर लाइट को कम करने में भी सक्षम बनाता है।