AQI ही नहीं... प्रदूषण की निगरानी में भी नंबर वन है दिल्ली, CSE रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
दिल्ली देश में वायु गुणवत्ता निगरानी में नंबर वन है, जहां 46 रियल-टाइम सेंटर हैं। हालांकि, CSE की रिपोर्ट बताती ...और पढ़ें
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दिल्ली देश में वायु गुणवत्ता निगरानी में नंबर वन है, जहां 46 रियल-टाइम सेंटर हैं। इमेज एआई जेनरेटेड
HighLights
दिल्ली में 46 रियल-टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेंटर।
भारत की 85% आबादी के पास विश्वसनीय निगरानी नहीं।
हाइब्रिड नेटवर्क डिज़ाइन अपनाने का सुझाव दिया गया।
संजीव गुप्ता, नीमली (अलवर)। देश की राजधानी न सिर्फ प्रदूषण के मामले में, बल्कि इसकी मॉनिटरिंग में भी देश का नंबर वन शहर है। छह नए सेंटर बनने के साथ, अब 46 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेंटर हो गए हैं, जो सभी रियल-टाइम हैं। भारत के किसी दूसरे शहर में इतना बड़ा मॉनिटरिंग नेटवर्क नहीं है। दिल्ली की सिर्फ 3.5 परसेंट आबादी ही मॉनिटरिंग के दायरे में नहीं है।
यह जानकारी सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) के अनिल अग्रवाल एनवायरनमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में हो रहे तीन दिन के "अनिल अग्रवाल डायलॉग 2026" के दूसरे दिन एक प्रेजेंटेशन में सामने आई। हालांकि, "स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट 2026" रिपोर्ट पर आधारित प्रेजेंटेशन में यह भी चिंता जताई गई कि राजधानी में ज्यादातर एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन या तो ग्रीन एरिया में हैं या किसी इंस्टीट्यूशन के कैंपस में हैं। इससे AQI की सही तस्वीर नहीं मिलती।
दूसरी तरफ, इस प्रेजेंटेशन के मुताबिक, भारत की 1.4 बिलियन आबादी में से सिर्फ़ 15 परसेंट लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं जहाँ 10 km के दायरे में रियल-टाइम एयर मॉनिटर लगे हैं। बाकी 85 परसेंट (लगभग 1.2 बिलियन लोग) ऐसे इलाकों में रहते हैं जहाँ एयर क्वालिटी मापने का कोई भरोसेमंद तरीका नहीं है।
असमान मॉनिटरिंग नेटवर्क: एक बड़ा संकट
CSE की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुमिता रॉयचौधरी के मुताबिक, एयर मॉनिटरिंग की यह कमी सिर्फ़ जानकारी की कमी नहीं है, बल्कि गवर्नेंस में भी कमी है। अभी, भारत के 294 शहरों में 562 रियल-टाइम मॉनिटर हैं, लेकिन ये कुछ बड़े शहरों तक ही सीमित हैं।
"हाइब्रिड नेटवर्क डिजाइन" अपनाने का सुझाव
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को सिर्फ महंगे सरकारी मॉनिटर पर निर्भर रहने के बजाय "हाइब्रिड नेटवर्क डिज़ाइन" अपनाना चाहिए। इसमें सैटेलाइट डेटा और कम कीमत वाले सेंसर शामिल होने चाहिए। इसके अलावा, स्कूल और अस्पताल जैसे सेंसिटिव इलाकों में मॉनिटरिंग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
खास बातें
- फरवरी 2026 तक, देश भर के 299 शहरों में 571 रियल-टाइम मॉनिटरिंग स्टेशन हैं।
- नवंबर 2024 तक, देश भर के 419 शहरों में 966 मैनुअल मॉनिटरिंग स्टेशन हैं।
- अंधेरे में जिले: भारत के 742 ज़िलों में से 64 प्रतिशत में एक भी रियल-टाइम मॉनिटर नहीं है।
- इंडस्ट्रियल बेल्ट को नजरअंदाज करना: कई इंडस्ट्रियल एरिया और तेज़ी से बढ़ते शहरी इलाके अभी भी मॉनिटरिंग ग्रिड से बाहर हैं।
- सही डेटा: चंडीगढ़ (100 प्रतिशत कवरेज) के बाद, दिल्ली देश का दूसरा राज्य/UT है जहाँ लगभग हर नागरिक को अपने इलाके की एयर क्वालिटी (AQI) की जानकारी मिलती है। पुडुचेरी तीसरे नंबर पर है, जहाँ लगभग 50 प्रतिशत इलाका मॉनिटरिंग स्टेशनों से कवर है।
- तुलनात्मक स्थिति: दिल्ली की तुलना में, बिहार में सिर्फ़ 13 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में सिर्फ़ नौ प्रतिशत आबादी ही मॉनिटरिंग ग्रिड से कवर है।
- राज्य की स्थिति: महाराष्ट्र में, मॉनिटर मुंबई, पुणे और नागपुर तक ही सीमित हैं। पश्चिम बंगाल में, हुगली और मुर्शिदाबाद जैसे घनी आबादी वाले जिलों में, कोई रियल-टाइम मॉनिटर नहीं हैं। असम को छोड़कर, पूर्वोत्तर राज्यों में केवल एक या दो स्टेशन हैं।
आगे का रास्ता: एक हाइब्रिड मॉडल की जरूरत
जब तक प्रदूषण एक रिकॉर्डेड डेटा नहीं बन जाता, तब तक इसके खिलाफ़ असरदार पॉलिसी बनाना और फंड का सही इस्तेमाल करना मुश्किल होगा।
-शरणजीत कौर, डिप्टी प्रोग्राम मैनेजर, CSE
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