दिल्ली में ट्रैफिक चालान के नए नियमों पर वकीलों का विरोध प्रदर्शन, कड़कड़डूमा कोर्ट में कार्य बहिष्कार
कड़कड़डूमा कोर्ट के वकीलों ने ट्रैफिक चालान के निपटारे का अधिकार न्यायिक मजिस्ट्रेट से एसडीएम व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को दिए जाने के विरोध में कार्य बहिष्कार किया।
HighLights
कड़कड़डूमा कोर्ट के वकीलों ने किया कार्य बहिष्कार।
ट्रैफिक चालान निपटारे के नए नियमों का विरोध।
न्यायिक प्रक्रिया को प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपने पर आपत्ति।
जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। ट्रैफिक चालान के निपटारे का अधिकार न्यायिक मजिस्ट्रेट से लेकर एसडीएम व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को दिए जाने के विरोध में सोमवार को कड़कड़डूमा कोर्ट के अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार किया। सुबह से ही अधिवक्ता कोर्ट परिसर में एकजुट होकर प्रदर्शन करते रहे। इस दौरान वकीलों ने न तो अदालतों में प्रत्यक्ष रूप से पेश होकर काम किया और न ही वर्चुअल सुनवाई में हिस्सा लिया।
को-ऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली के महासचिव नरवीर डावास ने बताया कि 19 सितंबर को हुई आपात बैठक में 21 सितंबर को कार्य बहिष्कार और विरोध प्रदर्शन का निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा कि संशोधित केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत ट्रैफिक चालानों के निपटारे के लिए एसडीएम, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, तहसीलदार और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को अधिकार दिया जा रहा है।
चालान पर सुनवाई और उसका निपटारा न्यायिक प्रक्रिया: वकील
अधिवक्ताओं का कहना है कि चालान पर सुनवाई और उसका निपटारा न्यायिक प्रक्रिया है, इसलिए इसे प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपना शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के विपरीत है। इसके अलावा, प्रशासनिक प्राधिकारी के फैसले को अदालत में चुनौती देने के लिए चालान की 50 प्रतिशत राशि पहले जमा करने की शर्त पर भी वकीलों ने आपत्ति जताई है।
नरवीर डावास के अनुसार, संशोधित नियमों में 45 दिन के भीतर चालान को चुनौती नहीं देने पर उसे स्वीकार माना जाने का भी प्रावधान है। बार कमेटी का आरोप है कि सरकार के साथ हुई बैठकों में अधिकारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव केंद्र से बातचीत होने तक लागू नहीं करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद अधिकारियों को अधिसूचित कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कमेटी ने दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, दिल्ली पुलिस आयुक्त और दिल्ली सरकार के कानून विभाग के प्रमुख अधिकारियों को भी मामले से अवगत कराया है।
