38 करोड़ के खर्च से हर महीने ₹15 करोड़ बचाएगी दिल्ली पुलिस, 16 जेलों में लगेंगे 840 VC सिस्टम
दिल्ली की जेलों में कैदियों की अदालत में पेशी के लिए 840 वीडियो कॉन्फ्रेंस सिस्टम लगाए जाएंगे, जिस पर 38 ...और पढ़ें

दिल्ली की 16 जेलों में 840 वीडियो कॉन्फ्रेंस सिस्टम लगाए जाएंगे। AI जनरेटेड
HighLights
दिल्ली की जेलों में 840 वीडियो कॉन्फ्रेंस सिस्टम लगेंगे।
38 करोड़ रुपये के निवेश से 15 करोड़ मासिक बचत होगी।
कैदियों की पेशी आसान होगी, सुरक्षा जोखिम घटेंगे।
गौतम कुमार मिश्रा, पश्चिमी दिल्ली। दिल्ली की जेलों से कैदियों को अदालत में पेशी के लिए ले जाने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। दिल्ली की 16 जेलों में 840 वीडियो कॉन्फ्रेंस सिस्टम लगाए जाएंगे।
करीब 38 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इस व्यवस्था के तहत कैदी जेल में रहते हुए ही वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अदालत में पेश हो सकेंगे। इससे दिल्ली पुलिस को हर महीने होने वाले करीब 15 करोड़ रुपये के भुगतान की बचत होगी।
जेलों में जरूरत के अनुसार, सिस्टम लगाए जाएंगे। व्यवस्था लागू होने के बाद कैदियों को पेशी के लिए जेल से बाहर ले जाने की जरूरत काफी कम हो सकती है।
बचत की रकम से सुधरेंगी जेल की सुविधाएं
वीडियो कॉन्फ्रेंसग व्यवस्था से होने वाली बचत का इस्तेमाल जेलों में जरूरी सुविधाएं बेहतर बनाने और कैदियों के कल्याण पर किया जा सकेगा। जेलों में संचालित फैक्ट्रियों के आधुनिकीकरण, मशीनों में सुधार और कामकाज की सुविधाएं बढ़ाने के लिए अधिक फंड उपलब्ध हो सकेगा।
इससे कैदियों को हुनर सीखने और काम के बेहतर अवसर मिलेंगे। स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और पुनर्वास से जुड़ी गतिविधियों पर भी अधिक संसाधन खर्च किए जा सकेंगे।
सुरक्षा के साथ संसाधनों की भी बचत फिलहाल कैदियों को अदालत तक पहुंचाने, उनकी सुरक्षा और पेशी के बाद जेल वापस लाने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की तीसरी बटालियन संभालती है। इसके लिए जेल वैन और पुलिसकर्मियों की तैनाती करनी पड़ती है।
कैदियों की संख्या और उनकी सुरक्षा संबंधी संवेदनशीलता के अनुसार अतिरिक्त बल भी लगाना होता है। वीडियो कॉन्फ्रेंसग का दायरा बढ़ने से पुलिसकर्मियों की ड्यूटी का बोझ कम हो सकता है। जेल वैन की आवाजाही घटने से ईंधन पर खर्च बचेगा। साथ ही प्रदूषण और सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी।
जेल से बाहर ले जाने के जोखिम होंगे कम
कैदियों को जेल से अदालत तक ले जाने के दौरान सुरक्षा संबंधी कई चुनौतियां रहती हैं। रास्ते में जाम से पेशी में देरी हो सकती है। वैन और अदालत परिसर में कैदियों की सुरक्षा के लिए भी सतर्कता बरतनी पड़ती है। इस दौरान कैदियों के भागने, हमले या प्रतिबंधित सामान की आवाजाही जैसी आशंकाएं बनी रहती हैं।
नई व्यवस्था से इन जोखिमों को कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, जिन मामलों में कैदी को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश करना जरूरी होगा, वहां मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था के तहत ही इंतजाम किए जाएंगे।
