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सर्दियों में घर के अंदर भी घुट रहा दम, खाना पकाते वक्त PM 2.5 में 32% वृद्धि; लैंसेट काउंटडाउन की रिपोर्ट

Published: Thu, 05 Nov 2026 07:15 PM (IST)

दिल्ली में घरेलू वायु प्रदूषण, खासकर खाना पकाने और हीटिंग से, पीएम 2.5 में 32% की वृद्धि कर रहा है। ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड।

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड।

HighLights

  1. खाना पकाने, हीटिंग से दिल्ली के पीएम 2.5 में 32% वृद्धि।

  2. एलपीजी की उच्च लागत स्वच्छ ईंधन उपयोग में बड़ी बाधा।

  3. भारत में 38% वायु प्रदूषण मौतें घरेलू स्रोतों से हुईं।

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली में वायु प्रदूषण की चर्चा अक्सर सड़कों पर वाहनों के धुएं, निर्माण कार्यों की धूल और पराली जलाने तक सीमित रहती है। लेकिन घरों के भीतर भी प्रदूषण का एक ऐसा स्रोत मौजूद है, जिस पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जाता है। खाना पकाने, अगरबत्ती जलाने, सफाई और सर्दियों में गर्माहट के लिए लकड़ी, कोयला एवं अन्य ठोस ईंधन के इस्तेमाल से घरों के भीतर प्रदूषण बढ़ रहा है।

लैंसेट काउंटडाउन की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में वर्ष 2023 में वायु प्रदूषण से लगभग 22 लाख लोगों की मौत हुई। इनमें करीब 38 प्रतिशत मौतें घरेलू वायु प्रदूषण से जुड़ी थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदूषण से होने वाली असमय मौतों के कारण देश की अर्थव्यवस्था को लगभग 517 अरब डॉलर का नुकसान हुआ, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 13.5 प्रतिशत है।

सर्दियों में बढ़ता घरेलू प्रदूषण का स्तर

काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) के एक अध्ययन के अनुसार, घर में खाना पकाने और गर्माहट के लिए ईंधन जलाने से दिल्ली के पीएम 2.5 प्रदूषण में करीब 32 प्रतिशत तक की वृद्धि सामने आती है। अध्ययन के मुताबिक, सर्दी बढ़ने के साथ घरेलू हीटिंग और खाना पकाने की हिस्सेदारी बढ़ती है। ठंड के दौरान खुले में लकड़ी और कचरा जलाने से भी प्रदूषण बढ़ता है।

स्वच्छ ईंधन की पहुंच और इस्तेमाल में अंतर

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। हालांकि, कनेक्शन मिलने के बाद भी सभी परिवार नियमित रूप से एलपीजी का इस्तेमाल नहीं कर पाते। सिलिंडर की कीमत और रिफिल का खर्च इसकी बड़ी वजह हैं।

सीईईडब्ल्यू के 2026 के अध्ययन में 10 शहरों की अनौपचारिक बस्तियों के 1,100 से अधिक परिवारों का सर्वे किया गया। इसमें 87 प्रतिशत परिवारों के पास एलपीजी की पहुंच थी, लेकिन केवल 70 प्रतिशत परिवार स्वच्छ ईंधन का ही इस्तेमाल करते थे। एलपीजी का इस्तेमाल नहीं करने वाले परिवारों में 78 प्रतिशत ने इसकी कीमत को प्रमुख बाधा बताया।

दिल्ली और एनसीआर की चुनौती

दिल्ली में घरेलू प्रदूषण की समस्या दो स्तरों पर है। एक ओर खाना पकाने और घरेलू गतिविधियों से घर के भीतर प्रदूषण बढ़ता है, दूसरी ओर बाहर की प्रदूषित हवा भी घरों के भीतर पहुंचती है। दिल्ली के घरों में किए गए एक अन्य अध्ययन में बाहरी पीएम 2.5 और घर के भीतर के स्तर के बीच महत्वपूर्ण संबंध पाया गया।

ऐसे में केवल घरों में वेंटिलेशन बढ़ाने या रसोई में एग्जास्ट लगाने से समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी। स्वच्छ ईंधन का नियमित इस्तेमाल, घरेलू स्रोतों से निकलने वाले प्रदूषण में कमी और बाहर की हवा को साफ करना, तीनों जरूरी हैं।

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