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दिल्ली समेत देश में ‘Heat Emergency’ का संकट: 42°C में शरीर को 50°C वाला टॉर्चर, 3.4 करोड़ नौकरियों पर खतरा

Published: Fri, 24 Apr 2026 09:49 PM (IST)Updated: Sat, 25 Apr 2026 07:48 AM (IST)

राजधानी दिल्ली समेत पूरे भारत में 'वेट-बल्ब तापमान' के कारण 'हीट इमरजेंसी' का खतरा बढ़ गया है, जिससे स्वास्थ्य और ...और पढ़ें

दिल्ली में बन रहा वेटबल्ब बना जानलेवा। फोटो: एआई जनरेटेड

दिल्ली में बन रहा वेटबल्ब बना जानलेवा। फोटो: एआई जनरेटेड

HighLights

  1. दिल्ली में 'वेट-बल्ब तापमान' से 'हीट इमरजेंसी' का खतरा

  2. गर्मी से 2030 तक 3.4 करोड़ नौकरियां प्रभावित होने की आशंका

  3. तत्काल 'हीट एक्शन प्लान' लागू करने की आवश्यकता पर जोर

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। राजधानी में गर्मी अब केवल तापमान का बढ़ना नहीं, बल्कि 'वेट-बल्ब तापमान' (तापमान और उमस का जानलेवा मेल) का संकट बन गई है।

प्राकृतिक संसाधन रक्षा परिषद (NRDC) और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली उन प्रमुख हाॅटस्पाॅट में शामिल है जहां बढ़ता तापमान और कंक्रीट का जाल मिलकर 'हीट इमरजेंसी' के हालात बना रहे हैं।

इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में गर्मी अब राष्ट्रीय आपातकाल बन चुकी है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत के 57 प्रतिशत जिलों में रहने वाली तीन-चौथाई आबादी अब उस जानलेवा गर्मी की जद में है।

गर्मी के कारण खत्म हो सकती हैं 3.4 करोड़ नौकरियां 

रिपोर्ट के अनुसार, यह संकट केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की आर्थिक रीढ़ को भी तोड़ रहा है। आशंका है कि 2030 तक गर्मी के कारण भारत में 3.4 करोड़ नौकरियां खत्म हो सकती हैं।

उत्तर-पश्चिमी भारत के पारंपरिक 'हॉटस्पॉट' के अलावा अब महाराष्ट्र, बिहार और गुजरात जैसे राज्य इस अदृश्य आपदा के नए केंद्र बन गए हैं।

गिग वर्कर्स और श्रमिकाें की सुरक्षा पर भी चिंता  

रिपोर्ट दिल्ली जैसे महानगरों में काम करने वाले गीग वर्कर्स (जैसे डिलीवरी पार्टनर) व निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा पर भी चिंता जताती है, जो बिना किसी वैधानिक सुरक्षा के दिल्ली की भीषण लू में काम करने को मजबूर हैं।

रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली सहित उत्तर भारत के क्षेत्रों में प्रदूषण (एयरोसोल) के कारण अब तक तापमान में जो थोड़ी बहुत स्थिरता देखी गई थी, वह भविष्य में खत्म हो सकती है, जिससे गर्मी का प्रकोप और अधिक घातक हो जाएगा।

तापमान और अहसास का अंतर

अक्सर मौसम विभाग तापमान 42 डिग्री सेल्सियस बताता है, लेकिन 60 प्रतिशत से अधिक उमस होने पर शरीर इसे 50 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा महसूस करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब पसीना आना बंद हो जाए या पसीना सूखे नहीं, तो समझें कि शरीर का कूलिंग सिस्टम फेल हो चुका है।

डाॅक्टरों के अनुसार, यह स्थिति हीटस्ट्रोक के साथ-साथ किडनी व हार्ट फेल का कारण बन सकती है। चिड़चिड़ापन, भ्रम और पेशाब का कम होना इसके शुरुआती लक्षण हैं।

नौकरी पर संकट : बेरोजगारी नहीं, 'अक्षमता'

ग्लोबल हीट एंड कूलिंग फोरम में जारी की गई रिपोर्ट में 3.4 करोड़ नौकरियां खत्म होने की जो चेतावनी दी गई है, उसका सीधा संबंध 'काम करने की क्षमता' से है। यह छंटनी का मामला नहीं है, बल्कि भीषण गर्मी के कारण मजदूरों और फील्ड वर्कर्स के कार्य घंटों में होने वाली भारी कटौती है।

एक श्रमिक जो पहले आठ घंटे काम करता था, वह अब केवल चार से पांच घंटे ही शारीरिक श्रम कर पा रहा है, जिससे उसकी आय और अंततः उस क्षेत्र में रोजगार के अवसर खत्म हो रहे हैं।

बचाव और जरूरत

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि केवल पानी के बजाय ओआरएस या नमक-चीनी का घोल लें ताकि इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो। दिल्ली के लिए अब केवल सलाह नहीं, बल्कि 'हीट एक्शन प्लान' को कानूनी रूप से अनिवार्य करने की तत्काल आवश्यकता है।

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