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दिल्ली में IGL की PNG पाइपलाइन फटी, डेरावाल नगर से नॉर्थ कैंपस तक गैस सप्लाई ठप; डेढ़ लाख लोग परेशान

Published: Sun, 18 Oct 2026 12:40 AM (IST)

दिल्ली के राणा प्रताप बाग में सोलर पैनल के लिए अर्थ वायर डालते समय आईजीएल की पीएनजी पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो ...और पढ़ें

पीएनजी पाइपलाइन की मरम्मत करते कर्मी। फोटो: जागरण

पीएनजी पाइपलाइन की मरम्मत करते कर्मी। फोटो: जागरण

शशि ठाकुर, नई दिल्ली। राणा प्रताप बाग में जीटी रोड पर सोलर पैनल लगाने के लिए अर्थ वायर डालने के दौरान इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) की पीएनजी पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से डेरावाल नगर से नार्थ कैंपस तक कई इलाकों में गैस आपूर्ति ठप हो गई।

शनिवार शाम करीब 6:30 बजे से आपूर्ति बाधित होने के कारण करीब एक से डेढ़ लाख की आबादी प्रभावित हुई। घरों में रात का खाना बनाने से लेकर व्रत खोलने के लिए भोजन तैयार करने तक में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

देर रात तक मौके पर पाइपलाइन की मरम्मत का काम जारी था। स्थानीय निवासियों ने जब इसकी शिकायत हेल्पलाइन नंबर पर की तो कर्मचारियों ने उन्हें रात 12 बजे तक गैस आपूर्ति बहाल होने का आश्वासन दिया।

पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से गैस आपूर्ति ठप

स्थानीय लोगों के अनुसार दोपहर करीब 3:30 बजे जीटी रोड पर सोलर पैनल लगाने के लिए अर्थ वायर डालने का काम चल रहा था। इसी दौरान जमीन के नीचे से गुजर रही पीएनजी पाइपलाइन में छेद हो गया।

लोगों का कहना है कि मौके पर आईजीएल की पाइपलाइन को चिह्नित करने वाला पत्थर नहीं लगा था। ऐसे में काम के दौरान पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई। हालांकि, घटना के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।

डेरावाल नगर से नार्थ कैंपस तक असर

इसके बाद शाम करीब 6:30 बजे संबंधित क्षेत्र में गैस आपूर्ति बंद कर दी गई। डेरावाल नगर, राणा प्रताप बाग, शक्तिनगर और नार्थ कैंपस समेत आसपास की कालोनियों में रहने वाले परिवारों को परेशानी हुई।

शाम सात बजे से ही विभिन्न रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) के वाट्सएप समूहों में गैस आपूर्ति बंद होने की शिकायतें आने लगीं।

देर रात तक मरम्मत का काम जारी

स्थानीय आरडब्ल्यूए पदाधिकारी सौरव गांधी के अनुसार, पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से बड़ी आबादी प्रभावित हुई है। लोग गैस आपूर्ति बहाल होने का इंतजार कर रहे हैं।

देर रात तक घटनास्थल पर मरम्मत का काम जारी था। आपूर्ति सामान्य होने में देरी से उन परिवारों की परेशानी बढ़ गई, जिनके घरों में खाना बनाने का दूसरा विकल्प उपलब्ध नहीं था।

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