भारत की नारियां लाएंगी वैभव...के नारों से गूंजा आईजी स्टेडियम, दिल्ली में पहली बार जुटीं महिला किसान
दिल्ली में पहली बार भारतीय किसान संघ द्वारा आयोजित अखिल भारतीय महिला किसान कार्यकर्ता सम्मेलन में देशभर से हजारों महिला किसान पहुंचीं। इस दौरान खेती-बाड़ी के मुद्दों पर चर्चा हुई।

भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महिला किसान कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल हुईं अरुणाचल प्रदेश से आईं महिला किसान कार्यकर्ता। वीडियो ग्रैब
HighLights
दिल्ली में पहली बार हजारों महिला किसानों का ऐतिहासिक जुटान।
खेती-बाड़ी के मुद्दों पर चर्चा, नीतिगत निर्णयों में भागीदारी की मांग।
महिला किसानों ने अपने खर्च पर सम्मेलन में की शिरकत।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली पहली बार ऐतिहासिक एवं अनूठे रूप से देशभर से महिला किसानों के जुटान की गवाह बनी। दिल्ली सचिवालय के नजदीक स्थित इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महिला किसान कार्यकर्ता सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से पहुंची हजारों महिला किसानों ने शिरकत की।
जहां न सिर्फ खेती-बाड़ी की बातें हुई, बल्कि नीतिगत निर्णयों में महिला किसानों के बुनियादी मुद्दों को भी शामिल करने की मांग उठाई गई। विभिन्न सत्रों में उन्होंने कृषि क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों पर खुलकर मंथन किया और सरकार से इन विषयों पर शीघ्र नीतिगत कदम उठाने की मांग की।
महिलाएं वर्तमान में बराबरी की हिस्सेदारी निभा रहीं
कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए अखिल भारतीय महिला संयोजिका मंजू दीक्षित ने कहा कि अब समय आ गया है जब देश में महिला किसानों की पारंपरिक तस्वीर को बदला जाए। आज की नारी केवल चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आधुनिक तकनीक और ऊर्जा के साथ परिवार, समाज और देश के सर्वांगीण विकास में बराबरी की हिस्सेदारी निभा रही है।
सृजन और संवर्धन दोनों मोर्चों पर हैं महिलाएं
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कोटा कृषि विश्वविद्यालय की कुलपति व मुख्य अतिथि प्रो. विमला डूंकवाल ने कहा कि नारी शक्ति सृजन और संवर्धन दोनों मोर्चों पर एक साथ कार्य करने में पूरी तरह सक्षम है।
वह अन्नपूर्णा और दुर्गा का वह स्वरूप है, जो अधिकारों की मांग से पहले अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करती है। इस सत्र को संघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष के साईं रेड्डी, उपाध्यक्ष सुशीला विश्नोई और मंत्री वीना सतीश ने भी संबोधित किया।
कई राज्यों से आईं प्रतिभावान महिलाएं
विशेष कि सम्मेलन में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला किसानों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल और राष्ट्र सेविका समिति की सह संपर्क प्रमुख रितु शर्मा के हाथों सम्मानित किया गया।
इनमें महाराष्ट्र की सुनंदा सायसिंग (गौ-कृषि-वाणिज्यम्), पश्चिम बंगाल की दीपाली ओरांव (जैविक कृषि), गुजरात की कमला बेन (बीज संरक्षण), बिहार की पुष्पा सिंह (रोजगार सृजन) सहित ओडिशा और पश्चिम बंगाल की अन्य प्रतिभावान महिलाएं शामिल रहीं।
गौ-कृषि-वाणिज्यम् के बिना विकसित भारत असंभव: मोहिनी मोहन मिश्र
अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित और स्वस्थ भारत के संकल्प को गौ कृषि वाणिज्यम् और जैविक खेती के बिना पूरा नहीं किया जा सकता। उन्होंने सरकार से जहरमुक्त खेती, रोगमुक्त समाज और अमृत आहारयुक्त नीति तैयार करने का आह्वान किया। अखिल भारतीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी ने कहा कि स्वावलंबी और आत्मनिर्भर महिला किसानों को समाज में उचित प्रतिष्ठा मिलने से गांव और परिवार का गौरव स्वतः बढ़ेगा।
ग्रामीण भारत की संस्कृति की विविधता
विभिन्न राज्यों से आईं महिला किसानों की पारंपरिक वेशभूषा ने विविधता में एकता के दृश्यों को जीवंत कर दिया। महिलाओं ने अपनी स्थानीय भाषाओं में लोकगीत गाए और सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किए। सम्मेलन की बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें शामिल होने आईं अन्नदाता महिलाएं किसी सरकारी या अन्य सहायता के बिना अपने स्वयं के खर्च और टिकट पर पहुंचीं थी।
