दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में बड़ा 'खेल', मरीजों को असली की जगह दी जा रही थीं नकली दवाएं
सरकारी अस्पतालों में कैंसर मरीजों को महंगी असली दवाओं की जगह नकली दवाएं दी जा रही हैं। अंतरराज्यीय दवा माफिया ...और पढ़ें
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सरकारी अस्पतालों में कनली दवाओं का खेल। AI जनरेटेड
HighLights
महंगी कैंसर दवाओं की जगह नकली दवाएं दी जा रही हैं।
अंतरराज्यीय दवा माफिया और अस्पताल कर्मियों की मिलीभगत सामने आई।
दिल्ली सहित कई शहरों के 90 से अधिक अस्पताल जांच में।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सरकारी अस्पतालों में कैंसर मरीजों के उपचार के लिए रखी महंगी दवा को गायब कर उनकी जगह नकली दवा मरीजों को लगाई जा रही है। अंतरराज्यीय दवा माफिया आपसी मिलीभगत से इसे अंजाम दे रहे हैं।
दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (डीएससीआई) से चार महंगे कैंसर इंजेक्शन गायब होने के मामले ने इस मिलीभगत की पोल खोल दी है।
व्यवस्था पर सवाल खड़े किए
आरोप है कि सरकारी अस्पतालों से असली दवा खुले बाजार में बेची जाती और उनकी जगह सस्ती दवा या सलाइन भरकर उन्हें असली इंजेक्शन के रूप में सरकारी अस्पतालों में खपाया जा रहा है। इसने सरकारी अस्पताल में दवाओं के भंडारण, सुरक्षा और वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
50 लाख रुपये नकद बरामद
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली क्राइम ब्रांच की अगस्त में की गई कार्रवाई ने नकली दवाओं के नेटवर्क को उजागर किया था। 17 लोगों को गिरफ्तार कर उनसे करीब नौ करोड़ रुपये की दवा, 588 कैंसर इंजेक्शन और 50 लाख रुपये नकद भी बरामद किए थे। तब सामने आया था कि अंतरराज्यीय दवा माफिया आपसी मिलीभगत से सरकारी अस्पतालों और सीजीएचएस के स्टोर से असली दवाएं बाहर निकाल कर उसकी पैकेजिंग में नकली दवा भर कर उन्हें स्टोर में रख देते हैं।
बताया गया कि इस मामले में गिरफ्तार आरोपित विक्रम सिंह और वतन सैनी पर सीजीएचएस की दवा दूसरी जगह पहुंचाने, जबकि राजू मिश्रा पर नकली दवाएं तैयार करने में संलिप्त होने का आरोप है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जीटीबी एन्क्लेव थाने में दर्ज एफआइआर को क्राइम ब्रांच की जांच से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है।
वहीं, जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि डीएससीआइ से इंजेक्शन गायब होने की घटना का नकली दवा नेटवर्क से कोई संबंध है या नहीं। साथ ही अस्पताल में दवाओं के भंडारण और वितरण की जिम्मेदारी संभालने वालों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
90 से अधिक अस्पताल जांच के दायरे में
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु समेत कई शहरों में फैले अंतरराज्यीय दवा माफिया नेटवर्क में दिल्ली के 90 से अधिक अस्पतालों की भूमिका की जांच की जा रही है।
सामने आया है कि 100 से अधिक कैंसर मरीजों को नकली दवा दी गई थी। कुछ मामलों में दूसरे मरीजों के लिए निर्धारित दवा भी अन्य मरीजों को दिए जाने की भी जानकारी भी सामने आई है।
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