'पत्नी और बच्चे की मेंटनेंस राशि सालाना 5% बढ़ानी होगी', दिल्ली HC ने कहा- समय के साथ घटती है रुपये की कीमत
हाई कोर्ट ने महंगाई के कारण भरण-पोषण की कीमत घटने पर चिंता जताते हुए सालाना पांच प्रतिशत बढ़ोतरी का समर्थन ...और पढ़ें

पत्नी और बच्चे के भरण पोषण में करनी होगी सालाना बढ़ोतरी। फोटो: आर्काइव
HighLights
हाई कोर्ट ने सालाना 5% भरण-पोषण वृद्धि का समर्थन किया
महंगाई से गुजारे-भत्ते की कीमत कम होने पर चिंता जताई
पारिवारिक अदालत के पत्नी-बेटे को गुजारा भत्ता आदेश को सही ठहराया
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। सालाना पांच प्रतिशत भरण-पोषण बढ़ाने का समर्थन करते हुए हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि पत्नी और बच्चे को ऐसी भरण-पोषण राशि के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, जिसकी कीमत महंगाई के कारण हर साल कम होती जाए।
न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने कहा कि समय के साथ जीवन-यापन का खर्च और महंगाई बढ़ती है और इससे तय भरण-पोषण की असल कीमत धीरे-धीरे कम हो जाती है।
पीठ ने कहा कि सालाना उचित बढ़ोतरी का निर्देश देने से केवल दिए गए गुजारे-भत्ते की प्रभावशीलता बनी रहती है और इसे मनमाना या कानून के खिलाफ नहीं कहा जा सकता।
फैमिली कोर्ट का आदेश रखा बरकरार
अदालत ने उक्त टिप्पणी करते हुए कड़कड़डूमा के पारिवारिक अदालत के 13 फरवरी 2020 के निर्णय को सही ठहराया। महिला के पति ने कड़कड़डूमा स्थित पारिवारिक अदालत के आदेश को चुनौती दी थी।
पारिवारिक अदालत ने व्यक्ति को अपनी पत्नी को 15,000 रुपये और नाबालिग बेटे को 10,000 रुपये का मासिक गुजारा-भत्ता देने के साथ-साथ हर साल पांच प्रतिशत बढ़ोतरी करने का निर्देश दिया गया था।
पति ने आय और संपत्ति को लेकर दी दलील
महिला व याची की शादी पांच दिसंबर 2012 को हुई थी और 19 सितंबर 2013 को उनका बेटा हुआ था। महिला ने पति पर क्रूरता व दहेज की मांग का आरोप लगाया था और इसके बाद उसे ससुराल छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
उसने 17 नवंबर 2014 को महिला ने मामले में शिकायत कराई थी और इसके बाद से वह अपने स्वजन के साथ रह रही है। पति ने तर्क दिया कि पारिवारिक अदालत ने उसकी आर्थिक स्थिति का गलत आकलन किया, क्योंकि कोर्ट ने उन संपत्तियों को आधार बनाया जो असल में उसके पिता की थीं।
उसने दावा किया कि उसके पास कोई अचल संपत्ति नहीं है, वह किराए के मकान में रहता है। उसने यह भी कहा कि हास्पिटैलिटी मैनेजमेंट का कोर्स पूरा करने के बावजूद, वह हर महीने सिर्फ 11,000 रुपये कमा रहा था।
आय संबंधी दावे पर अदालत ने नहीं किया भरोसा
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने माना कि पारिवारिक अदालत ने अपने आय से जुड़े हलफनामों और साक्ष्यों की अच्छी तरह से जांच की थी। पीठ ने महज 11 हजार रुपये कमाने के संबंध में याची के दावों पर यकीन नहीं करने के पारिवारिक अदालत से निष्कर्ष से सहमति जताई।
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