बिना पूर्व मंजूरी के पेड़ों की छंटाई से जुड़ी दिल्ली सरकार की SOP पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक
दिल्ली हाई कोर्ट ने पेड़ों की छंटाई से संबंधित दिल्ली सरकार की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पर रोक लगा दी ...और पढ़ें

पेड़ों की छंटाई से जुड़ी दिल्ली सरकार की SOP पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक।
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने पेड़ों की छंटाई एसओपी पर रोक लगाई।
कोर्ट ने दिल्ली सरकार की नई एसओपी पर गंभीर सवाल उठाए।
2023 के आदेश का उल्लंघन करने पर सरकार को नोटिस जारी।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। बिना पूर्व मंजूरी के पेड़ों की छंटाई की से संबंधित दिल्ली सरकार की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पर गंभीर सवाल उठाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने अधिकारियों की खिंचाई की है। पेड़ोें की सुरक्षा को लेकर अहम आदेश देते हुए न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने दिल्ली सरकार की एसओपी पर रोक लगा दी।
पीठ ने कहा कि अदालत के 2023 को मानने के लिए अधिकारी बाध्य हैं और प्रतिवादी किसी अधिसूचना के माध्यम से किसी न्यायिक फैसले के प्रभाव को खत्म या नजरअंदाज नहीं कर सकते।
उक्त टिप्पणी के साथ अदालत ने दो मई 2025 को जारी अधिसूचना पर को सुनवाई की अगली तारीख तक के लिए रोक लगा दी। साथ ही दिल्ली सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर मामले पर चार सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले में अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।
अदालत ने उक्त आदेश विजय कुमार बिधूड़ी समेत कुछ अधिकारियों के खिलाफ भवरीन कंधारी द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ता ने पीठ को बताया कि 29 मई 2023 को अदालत ने एक मामले में आदेश दिया था कि दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम के तहत वृक्ष अधिकारी की विशेष अनुमति के बिना 15.7 सेंटीमीटर तक की मोटाई वाली डालियों की छंटाई पर रोक लगा दी थी।
कोर्ट ने पेड़ों की इस तरह की छंटाई की अनुमति देने से संबंधित पहले जारी किए गए दिशानिर्देशाें को भी रद कर दिया था। अदालत ने सूचित किया गया कि उक्त आदेश के बावजूद भी दो मई 2025 को एक अधिसूचना जारी कर पेड़ों की देखभाल और छंटाई के लिए एक नई एसओपी तय की गई है।
उक्त एसओपी के तहत कहा गया है कि 15.7 सेंटीमीटर से कम मोटाई वाली हल्की डाली की सामान्य देखभाल और हल्की छंटाई के लिए किसी पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं होगी। एसओपी में एमसीडी, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद, दिल्ली विकास प्राधिकरण और लाेक निर्माण विभाग जैसी एजेंसियों को भी कुछ मामलों में सार्वजनिक जगहों पर पेड़ों की छंटाई करने की अनुमति दी थी।
