विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'अपराध के दौरान मूकदर्शक बने रहना भी जुर्म', मामले की सुवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

Published: Mon, 26 Oct 2026 06:59 PM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि अपराध होते हुए देख कर भी मूक दर्शक ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट, जागरण आर्काइव।

दिल्ली हाई कोर्ट, जागरण आर्काइव।

HighLights

  1. मूक दर्शक बने रहना भी अपराध में सक्रिय भागीदारी के समान।

  2. दिल्ली हाई कोर्ट ने हत्या मामले में जमानत याचिका खारिज की।

  3. सीसीटीवी फुटेज को डिजिटल साक्ष्य मानकर फैसला सुनाया गया।

विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। हत्या के मामले में नियमित जमानत देने से इन्कार करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि अपराध होते देख मूक दर्शक बने रहना भी उसमें शामिल होने के समान हो सकता है।

न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की पीठ ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज के रूप में मौजूद डिजिटल साक्ष्य के तहत आरोपित के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनाता है।

अपराध के दौरान मूक दर्शक बनना भी दोषपूर्ण

पीठ ने कहा कि कभी-कभी कुछ न करना और मूक दर्शक बने रहना भी उतना ही दोषपूर्ण है, जितना खुद गलत काम करना। गलत होते देखकर खड़े रहना तटस्थता नहीं, बल्कि अपराध में शामिल होना है। इसके साथ ही अदालत ने बेटे द्वारा की गई हत्या की साजिश के आरोपित पिता अजीत कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी।

सीसीटीवी में कैद हुई पूरी घटना

अभियोजन के अनुसार, परिवार की एक महिला रिश्तेदार के प्रेम विवाह के बाद उपजे तनाव के चलते हत्या की गई। आरोप है कि वारदात के पहले योजना बनाई गई थी और सीसीटीवी फुटेज में अजीत कुमार अपने घर के पास मोबाइल फोन लेकर खड़ा दिखा।

मृतक को देखकर उसने बेटे से कुछ कहा। इसके तुरंत बाद बेटा चाकू लेकर घर से निकला और मृतक पर जानलेवा हमला कर दिया। अभियोजन का कहना है कि पिता पूरी घटना के दौरान वहीं खड़ा रहा और उसने बीच-बचाव या पीड़ित को बचाने की कोशिश नहीं की।

कोर्ट ने क्या कहा?

वहीं, याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि वह केवल वहां मौजूद था और उसने कोई हमला नहीं किया था। यह भी कहा गया कि मुख्य चश्मदीदों की गवाही हो चुकी है, इसलिए सुबूतों से छेड़छाड़ की आशंका नहीं है।

हालांकि, राहत देने से इन्कार करते हुए पीठ ने कहा कि आइपीसी की धारा 34 के तहत सभी आरोपितों का अपराध के लिए साझा इरादा होना पर्याप्त है और हमलावर को न रोकना सक्रिय भागीदारी माना जा सकता है। पीठ ने कहा कि योजना मौके पर या मौन सहमति से भी बन सकती है।

यह भी पढ़ें- घर में 'मौत का सामान' बनाने का भंडाफोड़: वेस्ट यूपी के जिलों व दिल्ली में हथियार सप्लाई करने वाले 5 आरोपित मेरठ से गिरफ्तार

यह भी पढ़ें- दीवाली-छठ से पहले IRCTC का बड़ा तोहफा! दिल्ली-मुंबई से चलेंगी स्लीपर वंदे भारत, रूट से लेकर किराए तक; पूरी डिटेल