घर में 'मौत का सामान' बनाने का भंडाफोड़: वेस्ट यूपी के जिलों व दिल्ली में हथियार सप्लाई करने वाले 5 आरोपित मेरठ से गिरफ्तार
Meerut News: मेरठ में पुलिस ने एक अवैध हथियार कारखाने का भंडाफोड़ करते हुए पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
पुलिस ने इंचौली की आशियाना कालोनी स्थित मकान पर दी दबिश।
वेस्ट यूपी, हरियाणा और दिल्ली के कई बदमाशों को मुहैया कराते थे हथियार।
जागरण संवाददाता, मेरठ। इंचौली में एक घर के अंदर रात के अंधेरे में हथियार बनाए जाते थे और उनकी सप्लाई वेस्ट यूपी के जिला, दिल्ली तथा हरियाणा में की जाती थी।
रविवार को पुलिस ने लू-बक्सर चौराहे पर चेकिंग के दौरान हथियारों की सप्लाई के लिए जा रहे दो बदमाशों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया। उनकी निशानदेही पर घर में चल रहे हथियार कारखाने का पता चला। पुलिस ने वहां से तीन अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार किया। घर से हथियारों की बड़ी खेप और उन्हें बनाने के उपकरण बरामद किए गए।
पुलिस को देखते ही की फायरिंग
पुलिस लाइन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली कि लू-बक्सर मोड से कुछ आगे दो हथियार तस्कर तमंचों की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। भावनपुर पुलिस ने दोनों को पकड़ने का प्रयास किया। पुलिस को देखते ही हथियार तस्करों ने फायरिंग कर दी। हालांकि, पुलिसकर्मियों को गोली नहीं लगी।
टीम ने घेराबंदी कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित की पहचान सलीमुद्दीन निवासी अहमदनगर बड़ला, थाना किला परीक्षितगढ़ और संतरपाल निवासी मुबारिकपुर, थाना भावनपुर के रूप में हुई।
दोनों के कब्जे से 315 बोर के एक-एक तमंचे, नाल में फंसा एक-एक खोखा कारतूस और एक-एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ। पूछताछ में आरोपितों से अवैध असलहा बनाने और सप्लाई करने वाले अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिली।
अवैध हथियार फैक्ट्री पर दबिश
संतरपाल की निशानदेही पर थाना भावनपुर और इंचौली पुलिस ने इंचौली की आशियाना कालोनी स्थित मेहराजुद्दीन के मकान पर दबिश दी।
मकान के पिछले कमरे में अवैध तमंचे बनाने का काम चल रहा था। पुलिस ने मौके से मेहराजुद्दीन, सारून और राशिद को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपितों ने अवैध शस्त्र बनाने और आर्थिक लाभ के लिए उनकी बिक्री करने की बात स्वीकार की। पुलिस ने मौके से छह तमंचे, 11 अर्धनिर्मित तमंचे, चार कारतूस और दो खोखा बरामद किए।
आठ नाल, 27 स्प्रिंग, 50 फायरिंग पिन, छोटी-बड़ी हथौड़ियां, छेनी, प्लास, लोहे की रॉड और पत्तियां, ग्राइंडर व ड्रिल मशीन समेत असलहा बनाने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं।
सारून पर 1992 में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था।
वह 2005 तक जेल में रहा। तभी भावनपुर के जेई निवासी सारून की जेल में अन्य बदमाशों से दोस्ती हो गई। सारून ने इंचौली की आशियाना कालोनी निवासी मेहराजुद्दीन के घर में हथियार बनाने का काम शुरू कर दिया।
सारून ने अपने साथ राशिद निवासी अमहदनगर बड़ला परीक्षितगढ़ को भी साथ ले लिया। हथियार बनाने के बाद सलीमुद्दीन निवासी अमहदनगर बड़ला और संतरपाल निवासी मुबारिकपुर भावनपुर को मुहैया कराते थे।
सलीमुद्दीन और संतरपाल ही हथियारों की सप्लाई करते थे। वेस्ट यूपी, हरियाणा और दिल्ली के कई बदमाशों को हथियार मुहैया कराते थे। साथ ही देहात क्षेत्र में भी तमंचा साढ़े तीन हजार में बेच रहे थे। उनके यहां से तमंचा खरीदकर ही देहात क्षेत्र में फायरिंग की घटनाओं को अंजाम दिया जाता है।
