'सरकारी जमीन पर नहीं रहेगा मंदिर', दिल्ली HC ने प्रियदर्शनी विहार अवैध मंदिर के मामले में खारिज की याचिका
दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रियदर्शनी विहार में नर्सरी स्कूल की जमीन पर बने मंदिर को बनाए रखने की याचिका खारिज ...और पढ़ें

सरकारी जमीन पर मंदिर बने रहने की याचिका खारिज। फोटो: आर्काइव
HighLights
हाई कोर्ट ने नर्सरी स्कूल की जमीन पर बने मंदिर की याचिका खारिज की
मंदिर सरकारी जमीन पर बिना मंजूरी के अवैध रूप से निर्मित था
डीडीए के 2021 के फैसले को रद्द करने की मांग खारिज हुई
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। प्रियदर्शनी विहार में नर्सरी स्कूल के लिए आवंटित जमीन पर बने मंदिर को बनाए रखने की मांग वाली याचिका दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है।
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा कि मंदिर बिना मंजूरी के और सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से बनाया गया था और इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है।
डीडीए के 2021 के फैसले को रद करने की थी मांग
याचिकाकर्ता संस्था ने कोर्ट से डीडीए के 2021 के फैसले को रद करने और वहां बने मंदिर को बनाए रखने की मांग की थी। कोर्ट ने पाया कि यह जमीन मूल रूप से नर्सरी स्कूल के लिए तय की गई थी।
इलाके को विकसित कर रहे अमेरिकन एम्बेसी एम्प्लाइज कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी ने बाद में मंदिर बनाने के लिए जमीन के आवंटन की मांग की थी।
1987 में अलग धार्मिक सोसाइटी बनाने को कहा था
डीडीए ने 1987 में सोसायटी से एक अलग धार्मिक सोसायटी बनाने और आवंटन के लिए आवेदन करने के लिए कहा था। इसके बाद याचिकाकर्ता-सोसायटी बनाई गई।
बिना मंजूरी मंदिर निर्माण को कोर्ट ने माना अवैध
हालांकि, फैसले के मुताबिक, उसने 1991-92 में बिना जमीन के इस्तेमाल में बदलाव या डीडीए से मंजूरी लिए बगैर अवैध रूप से मंदिर का निर्माण किया।
यह भी पढ़ें- दिल्ली में सेफ नहीं साइकिल चलाने वाले, पुलिस तक नहीं पहुंचे 97% एक्सीडेंट; IIT की स्टडी में खुलासा
