'भारत में मजदूरों को मिलता है सबसे कम वेतन, नहीं होती शारीरिक श्रम की कद्र', दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी
दिल्ली हाई कोर्ट ने देश में मजदूरों को मिलने वाले कम वेतन और उनके शारीरिक श्रम के प्रति समाज में ...और पढ़ें

दिल्ली हाईकोर्ट।
HighLights
हाई कोर्ट ने मजदूरों के कम वेतन पर चिंता जताई।
समाज शारीरिक श्रम का सम्मान नहीं करता, अदालत ने कहा।
एक मजदूर पर हमले के मामले में सजा घटाई गई।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि देश में मजदूरों को सबसे कम वेतन और देखभाल मिलती है और समाज उनकी शारीरिक मेहनत की कद्र और सम्मान नहीं करता है। अदालत ने उक्त टिप्पणी एक मजदूर पर हमला करने के आरोप में दोषी ठहरा कर पांच साल की सजा सुनाने के खिलाफ गए व्यक्ति की अपील याचिका पर सुनवाई करते हुए की।
न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की पीठ ने दुख प्रकट करते हुए कहा कि यह बुनियादी जरूरत देश के मजदूरों के लिए एक आम और कभी न खत्म होने वाली मुसीबत बन गई है।
पीठ ने प्रकरण की तुलना पश्चिमी देशों से की
अपील याचिका पर निर्णय सुनाते हुए पीठ ने प्रकरण की तुलना पश्चिमी देशों से की, जहां शारीरिक मेहनत का उचित मेहनताना और सम्मान मिलता है। याचिका के अनुसार 17 मार्च 2002 की रात चांदनी चौक के लाजपत राय मार्केट में एक दुकान पर काम करने वाले कामगार राजिंदर कुमार दुकान के बरामदे में सो रहे थे।
मोची के चमड़ा काटने वाले औजार से हमला किया
इस दौरान अपीलकर्ता व्यक्ति व उसके साथी शोर व हंगामा मचा रहे थे। इससे परेशान होकर राजिंदर ने जब उन्हें ऐसा न करने को कहा तो अपीलीकर्ता ने गुस्से में उन्हें धक्का दिया और फिर मोची के चमड़ा काटने वाले औजार से हमला किया। इस हमले से उनके गाल से लेकर छाती तक गहरा जख्म हो गया और वह बेहोश हो गए।
मामले पर सुनवाई के बाद पीठ ने माना कि मामले के तथ्यों से यह साबित नहीं हुआ कि उसमें हत्या की कोशिश का इरादा था। कोर्ट ने पांच साल की जेल की सजा को भी घटाकर तीन साल कर दिया, लेकिन जुर्माना बरकरार रखा।
