'पैसे के समझौते पर जमानत नहीं दी जा सकती', दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
दिल्ली हाई कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि जमानत पैसे के ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया।
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत पर महत्वपूर्ण निर्णय दिया।
पैसे के समझौते पर जमानत नहीं दी जा सकती।
समझौता न मानना जमानत रद करने का आधार नहीं।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। बैंक से धोखाधड़ी के एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत याचिका पर महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। कोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी को शिकायतकर्ता के साथ हुए पैसे के समझौते को पूरा करने की शर्त पर जमानत नहीं दी जा सकती।
न्यायमूर्ति संजीव नरुला की पीठ ने सत्र अदालत के निर्णय को रद करते हुए कहा कि पैसे के समझौते को पूरा न करना जमानत देने या रद करने का आधार नहीं हो सकता। जमानत अर्जी पर विचार करते समय आरोपी के खिलाफ मौजूद सुबूतों और अन्य तथ्यों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
पीठ ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह मामले की खूबियों के आधार पर आरोपी की जमानत अर्जी पर नए सिरे से विचार करे।
दर्ज किया था मामला
यह मामला 2018 में आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज किया गया था, जिसमें आरोपी गुरमीत सिंह पर आइपीसी की धारा-420 (धोखाधड़ी) और धारा-120 बी (आपराधिक साजिश) सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
2022 में गिरफ्तार किए गए
आरोप था कि आरोपी ने जाली दस्तावेज के आधार पर बैंक से 50 लाख रुपये की कैश-क्रेडिट सुविधा प्राप्त की थी। अगस्त 2022 में गिरफ्तार किए गए आरोपी को नवंबर 2022 में जमानत दे दी गई थी, जिसके तहत दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ था। हालांकि, जब आरोपी ने समझौते के अनुसार भुगतान नहीं किया, तो बैंक ने जमानत रद करने की मांग की, जिसे सत्र अदालत ने स्वीकार कर लिया।
इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि जमानत देने के लिए केवल वित्तीय समझौते का पालन करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मामले के अन्य पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
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