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क्या है हीट स्ट्रोक? लापरवाही हो सकती है जानलेवा; बचाव के लिए इन 10 बातों का रखें ध्यान

Published: Thu, 23 Apr 2026 03:59 PM (IST)Updated: Thu, 23 Apr 2026 04:01 PM (IST)

डॉक्टरों ने हीट स्ट्रोक को जानलेवा आपातकाल बताते हुए समय पर पहचान, उपचार और सावधानी को बचाव का सबसे मजबूत उपाय बताया है।

तेज धूप में घूमने निकले लोगों ने खुद को पूरी तरह से किया कवर। एएनआई

तेज धूप में घूमने निकले लोगों ने खुद को पूरी तरह से किया कवर। एएनआई

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संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। चेतावनी है कि दो से तीन दिनों में यह 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाएगा और लू (हीट स्ट्रोक) चलने लगेगी, यलो अलर्ट जारी किया गया है।

भारतीय मौसम विभाग (आइएमडी) के अनुसार दिल्ली सहित उत्तर और मध्य भारत में हीटवेव की स्थिति और तेज होने की आशंका है।

ऐसे में हीट स्ट्रोक (लू लगना) का खतरा तेजी से बढ़ गया है, जिसे डॉक्टर एक जानलेवा आपातकाल मानते हैं। उनके अनुसार समय पर पहचान, तुरंत उपचार और सावधानी ही हीट स्ट्रोक से बचाव का सबसे मजबूत उपाय है।

क्या है हीट स्ट्रोक

हीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर का तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है और शरीर की प्राकृतिक कूलिंग प्रणाली पूरी तरह फेल हो जाती है। इसके लक्षणों में बेहोशी, भ्रम, तेज कमजोरी, त्वचा का गर्म और सूखा होना, उल्टी, चक्कर और दौरे शामिल हैं।

समय पर इलाज न मिलने पर दिमाग, किडनी और लीवर जैसे महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। 2025 की गर्मियों में दिल्ली में हीटवेव का असर गंभीर रहा था।

स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों से जुड़े अधिकारियों के अनुसार राजधानी में 7,000 से अधिक हीट-रिलेटेड मरीज विभिन्न अस्पतालों में दर्ज किए गए, जिनमें हीट एक्साशन और हीट स्ट्रोक के मामले शामिल थे।

कई मामलों में मौतें भी दर्ज की गईं, हालांकि समेकित आधिकारिक आंकड़ा अब तक जारी नहीं किए गए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इससे पहले 2024 की भीषण गर्मी के दौरान दिल्ली में 58 के करीब मौत हीटवेव से जुड़ी दर्ज की गई थीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक आंकड़े इससे अधिक हो सकते हैं, क्योंकि कई केस अलग श्रेणियों में दर्ज हो जाते हैं।

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अस्पतालों में बढ़ी तैयारियां

डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल समेत दिल्ली के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में गर्मी बढ़ते ही मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है।

चक्कर, उल्टी और डिहाइड्रेशन के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इमरजेंसी सेवाओं को अलर्ट पर रखा गया है और विशेष हीट स्ट्रोक यूनिट सक्रिय कर दी गई हैं। लोकनायक अस्पताल में हीटवेव को देखते हुए इमरजेंसी और वार्ड स्तर पर अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गई है।

यहां ठंडे पानी, ओआरएस और कूलिंग फैन, एयर कंडीशनिंग की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, ताकि हीट स्ट्रोक व डिहाइड्रेशन के मरीजों को तुरंत राहत मिल सके। गुरु तेग बहादुर अस्पताल (जीटीबी) में भी हीट-रिलेटेड मामलों के लिए अलग से निगरानी और उपचार की व्यवस्था की गई है। दवाओं और इमरजेंसी रिस्पॉन्स को मजबूत किया गया है।

डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में है विशेष तैयारी

डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार अस्पताल में अत्याधुनिक हीट स्ट्रोक यूनिट स्थापित की गई है। यह यूनिट उन्नत सुविधाओं से लैस है। इस यूनिट में दो प्रमुख हिस्से हैं...

  1. डायनामिक कंपोनेंट: एम्बुलेंस आधारित त्वरित कूलिंग, आइस बाक्स, इनफ्लेटेबल टब और मानिटरिंग उपकरण।
  2. स्टैटिक कंपोनेंट: कूलिंग टब, आइस मेकिंग सिस्टम, एयर कंडीशनिंग, मल्टीपैरामीटर मानिटर, डिफिब्रिलेशन और 24 घंटे ब्लड बैंक सुविधा।

क्या करें

  • मरीज को तुरंत छाया या ठंडी जगह पर ले जाएं
  • शरीर को गीला कपड़ा या बर्फ से ठंडा करें
  • गर्दन, बगल और जांघों पर ठंडक दें
  • होश में हो तो पानी पिलाएं
  • तुरंत अस्पताल पहुंचाएं
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सावधानी

  • दोपहर 12 से 4 बजे के बीच धूप से बचें
  • हल्के और ढीले कपड़े पहनें
  • पर्याप्त पानी और ओआरएस लेते रहें
  • कैफीन और अल्कोहल से बचें
  • बच्चों, बुजुर्गों और मजदूरों पर विशेष ध्यान रखें
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विशेषज्ञ सलाह

हीट स्ट्रोक के मामलों में ‘गोल्डन आवर’ सबसे अहम होता है। यदि इसी दौरान मरीज को तेजी से कूलिंग मिल जाए तो जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। गर्मी के दौरान शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना और धूप से बचना सबसे जरूरी है। लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।- डॉ. अजय चौहान, मेडिसिन विभाग, आरएमएल अस्पताल