650 करोड़ के दिल्ली स्वास्थ्य घोटाले की जांच का दायरा बढ़ा, अस्पतालों की अनियमितताएं उजागर
दिल्ली में 650 करोड़ के स्वास्थ्य घोटाले की जांच अब अस्पतालों तक पहुंच गई है, जहां दवा और उपकरण खरीद में व्यापक अनियमितताएं सामने आ रही हैं।

दिल्ली में 650 करोड़ के स्वास्थ्य घोटाले की जांच अब अस्पतालों तक पहुंच गई है। इमेज एआई
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में 650 करोड़ रुपये के दवा एवं चिकित्सा उपकरण खरीद घोटाले की जांच सीपीए तक सीमित नहीं रही। अस्पतालों की हो रही स्टाक आडिट में इस जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है, एक-एक कर दिल्ली सरकार के अस्पतालों में दवा तथा उपकरण खरीद से जुड़ी अनियमितताएं सामने आने लगी हैं।
जांच एजेंसियों का मानना है कि खरीद प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर हेराफेरी का प्रभाव अस्पतालों तक भी पहुंचा है। इसी कड़ी में अस्पतालों के खरीद रिकार्ड, भुगतान, स्टाक और उपयोग का मिलान किया जा रहा है। नया मामला जीबी पंत अस्पताल का है, जहां एसीबी ने 15 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं की जांच शुरू की है।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जांच केवल दवा खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दवाओं एवं उपकरणों की खरीद, बिना टेंडर भुगतान, बाजार से अधिक कीमत पर खरीद, स्टोर एवं भुगतान रिकॉर्ड, अनुबंधों में गड़बड़ी तथा 12 वर्ष से बिना नवीनीकरण संचालित कैंटीन ठेके सहित कई वित्तीय मामलों को शामिल किया गया है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच 75 दिनों में 63.30 लाख रुपये की दवाएं खरीदी गईं और कुछ दिनों में 27 लाख रुपये तक के बिल जारी किए गए, इसकी भी जांच हो रही है।
आरोप है कि यह खरीद बिना टेंडर के अधिक कीमतों पर की गई। साथ ही अन्य वित्तीय अनियमितताओं भी गईं। इससे पहले लोकनायक अस्पताल में करीब 17.70 करोड़ रुपये के टेंडर में अनियमितताओं का मामला सामने आया था।
आरोप है कि निविदा प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर कुछ चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई थी। गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल में भी दवा और चिकित्सा उपकरणों की खरीद, कीमतों तथा फाइल प्रक्रिया में गड़बड़ियों की जांच चल रही है। कुछ अन्य अस्पतालों के रिकार्ड भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।
पता लगाया जा रहा है कि सीपीए के माध्यम से खरीदी गई दवाएं और उपकरण अस्पतालों में वास्तविक आवश्यकता के अनुसार भेजे गए या नहीं। कई अस्पतालों में जरूरत से अधिक या अनुपयोगी सामान की आपूर्ति, ऊंची कीमतों पर खरीद और रिकार्ड में विसंगतियों की भी जांच की जा रही है।
जांच के केंद्र में 650 करोड़ रुपये का वही खरीद घोटाला है, जिसमें आरोप है कि अधिकारियों और सप्लायरों की मिलीभगत से खरीद प्रक्रिया में हेराफेरी कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि अस्पताल स्तर पर सामने आ रही ये अनियमितताएं इस बात के संकेत हैं कि 650 करोड़ का दवा और उपकरण खरीद घोटाला केवल एक एजेंसी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसकी कड़ियां पूरे खरीद तंत्र में फैली हो सकती हैं।
यही वजह है कि अब एसीबी और अन्य जांच एजेंसियां एक-एक अस्पताल के खरीद रिकार्ड, भुगतान और स्टाक का विस्तृत आडिट कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
पहले भी विवादों में रहा जीबी पंत अस्पताल
जीबी पंत अस्पताल पहले भी गंभीर प्रशासनिक विवादों के कारण चर्चा में रहा है। अस्पताल के जैव रसायन विभाग की तत्कालीन विभागाध्यक्ष डा. मंजू सुब्बरवाल पर आरोप लगा था कि वह लगभग तीन वर्ष तक बिना विधिवत अनुमति के कनाडा में फिल्म निर्माण से जुड़ी रहीं और इस दौरान सरकारी वेतन भी लेती रहीं।
मामले के सामने आने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया और विभागीय कार्रवाई शुरू की। पर, इन सबका क्या हुआ इसकी जानकारी कभी सार्वजनिक नहीं की गई।
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