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'वैंलेंटाइन डे पर दोस्ती जबरदस्ती यौन संबंध बनाने का लाइसेंस नहीं', दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी

Published: Sun, 22 Mar 2026 04:01 PM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने पॉक्सो मामले में आरोपी वसीम अख्तर की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि ...और पढ़ें

नाबालिग लड़की के साथ जबरदस्ती यौन संबंध बनाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने की टिप्पणी।

नाबालिग लड़की के साथ जबरदस्ती यौन संबंध बनाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने की टिप्पणी।

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विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने पॉ

क्सो मामले में एक आरोपित की नियमित जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि वैलेंटाइन-डे पर किसी लड़की का किसी लड़के से दोस्ती करना, उसके साथ जबरदस्ती यौन संबंध बनाने का लाइसेंस नहीं देता है।

न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने कहा कि यहां तक कि लड़की की मांग में उसकी सहमति के बिना सिंदूर लगाना भी उचित नहीं ठहराया जा सकता, भले ही यह कानून में निर्धारित अपराध न हो।

उक्त टिप्पणी के साथ अदालत ने आरोपित वसीम अख्तर की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। स्वजन की शिकायत पर पुलिस ने करावल नगर थाने में फरवरी 2025 में प्राथमिकी हुई थीञ आरोपित के खिलाफ फरवरी 2025 में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) -की धारा 64(एक) और 137(दो) और पाक्सो अधिनियम की धारा- चार के तहत प्राथमिकी की गई थी।

अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका विरोध करते हुए अदालत को बताया था कि 17 साल की लड़की का बयान दर्ज कराया गया था। इसमें उसने आरोप लगाया था कि वह आरोपित को करीब एक साल से जानती थी।

आरोपी ने लड़की के मांग में जबरदस्ती सिंदूर भरा

14 फरवरी 2025 को आरोपित ने उसे बहाने से घर पर बुलाया और उसकी मांग में सिंदूर भरा और उसके विरोध के बावजूद उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। इस घटना के बाद पीड़िता के भाई ने पुलिस को सूचना दी और उसका पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया।

वहीं, आरोपित के अधिवक्ता ने तक दिया कि पीड़िता की उम्र 18 साल से ज्यादा थी और उसने आपसी सहमति से संबंध बनाए थे। यह भी तर्क दिया गया कि यह घटना वैलेंटाइन डे के दिन हुई थी और इससे एक प्रेम संबंध के पहलू होने का संकेत मिलता है।

लड़की ने खुद को कोर्ट में नाबालिग साबित किया

जबकि जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पीड़िता और उसके भाई ने ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष का समर्थन किया है और पीड़िता खुद जमानत का विरोध करने के लिए कोर्ट में पेश हुई थी। यह भी कहा कि स्कूल रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता की जन्मतिथि 14 जनवरी 2008 थी और उसका नाबालिग होना साबित होता है।

उक्त तथ्यों को देखते हुए अदालत ने कहा कि पीड़िता ने भी जमानत याचिका का विरोध किया और अदालत में मौजूद रही है। उक्त तथ्यों को देखते हुए आरोपित को जमानत पर रिहा करने का आधार नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि आदेश में की गई किसी भी टिप्पणी को मुकदमे के अंतिम चरण में किसी भी पक्ष के प्रतिकूल नहीं माना जाएगा।

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