विनेश फोगाट लड़ रहीं कुश्ती में वापसी की जंग, दिल्ली HC बोला- 'पुरुष आगे बढ़ते हैं, महिलाएं पीछे रह जाती हैं'
दिल्ली हाई कोर्ट ने विनेश फोगाट की याचिका पर सुनवाई करते हुए भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) को मातृत्व के बाद ...और पढ़ें

ओलिंपियन विनेश फोगाट की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को तल्ख टिप्पणी की। फाइल फोटो
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने WFI को मातृत्व दिशानिर्देश बनाने पर जोर दिया।
कोर्ट ने महिला एथलीटों के करियर पर पड़ने वाले प्रभाव पर चिंता जताई।
विनेश फोगाट ने चयन प्रक्रिया में भेदभाव का आरोप लगाया।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। ओलिंपियन विनेश फोगाट की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को टिप्पणी की कि भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) को देश और एथलीट (खासकर बच्चे के जन्म के बाद खेल में लौटने वाली महिला एथलीट) के हितों के बीच संतुलन बनाने के लिए दिशानिर्देश बनाने चाहिए।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने दुख जताया कि शादी और बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं को पीछे हटना पड़ता है, जबकि पुरुष अपने करियर में सफल होते हैं। कोर्ट ने कहा कि डब्ल्यूएफआई के पास कुछ दिशानिर्देश व समयसीमा होनी चाहिए क्योंकि इनके न होने से नाइंसाफी होती है।
पीठ ने निर्णय पारित करने का संकेत दिया
अदालत ने उक्त टिप्पणी गर्भावस्था व मैटरनिटी के बाद वापस लौटने वाली महिला खिलाड़ियों के संबंध में दिशानिर्देश देने की मांग वाली विनेश फाेगाट की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। साथ ही विनेश फोगाट ने 2026 सीनियर विश्व चैंपियनशिप के लिए महिला चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति मांग की है। मामले पर पीठ ने निर्णय पारित करने का संकेत दिया।
विनेश फोगाट ने फेडरेशन पर साधा निशाना
सुनवाई के दौरान, विनेश फोगाट की तरफ से कहा गया कि बुधवार को कान्स्टिट्यूशन क्लब में वह कारण बताओ नोटिस से संबंधित बैठक में शामिल होने आई थीं, लेकिन वहां डब्ल्यूएफआई का कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था। बाद में फेडरेशन ने कहा कि वह बैठक में शामिल नहीं हुईं। विनेश ने आरोप लगाया कि यह एक ऐसे संस्थान का मामला है जो जानबूझकर उन्हें निशाना बना रहा है।
फेडरेशन ने कहा- किसी ने नहीं रोका
उन्होंने कहा कि वह यह साबित कर सकती हैं कि डब्ल्यूएफआई का उनके प्रति नजरिया मनमाना है। उन्होंने तर्क दिया कि चयन प्रक्रिया के बारे में उन्हें सात सितंबर काे बताया गया, जबकि ट्रायल 14 सितंबर को होने हैं। हालांकि, डब्ल्यूएफआई ने तर्क दिया कि विनेश फोगाट को हिस्सा लेने से रोका नहीं गया है और अगर वह नीति के अनुसार योग्य हैं, तो वह ट्रायल में हिस्सा ले सकती हैं।
'विनेश ने कई सालों से कोई मेडल नहीं जीता'
उन्होंने कहा कि 2025, 2026 के मेडल विजेता योग्य होंगे, क्योंकि विनेश ने कई सालों से कोई मेडल नहीं जीता है। यह भी कहा कि मैटरनिटी के मामले में दूसरे पहलवान भी हैं, जो 100 प्रतिशत स्वथ्य हो जाती हैं और फिर ठीक वैसा ही प्रदर्शन करती हैं जैसा गर्भावस्था से पहले करती थीं। इस पर पीठ ने कहा कि यह नीतिगत समस्या है। साथ ही, अदालत ने फेडरेशन के कामकाज पर दिशानिर्देश व समयसीमा तय करने का संकेत दिया।
महिला एथलीटों के लिए एक नीति बनाने की मांग की
विनेश ने उन्हें अस्थायी रूप से योग्यता पूल में शामिल करने और इंदिरा गांधी स्टेडियम में 14 सितंबर को होने वाले महिला चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति देने का डब्ल्यूएफआई को निर्देश देने का अनुरोध किया है।
विनेश फोगाट ने कहा है कि नई चयन व्यवस्था एक बंद रास्ता बनाता है क्योंकि इसमें योग्यता को खास क्वालिफाइंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने और प्रदर्शन पर निर्भर कर दिया गया है। लंबित मूल याचिका में विनेश फोगाट ने गर्भावस्था व मैटरनिटी लीव के बाद खेलों में लौटने वाली महिला एथलीटों के लिए एक नीति बनाने की मांग की है।
