'बाप ने छोटी गाड़ी के पैसे दिए...', दहेज के तानों पर दिल्ली हाईकोर्ट का कड़ा रुख, पति पर चलेगा केस
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि दहेज में छोटी कार और कम सोना लाने के लिए महिला को बार-बार ताना मारना क्रूरता माना जा सकता है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। फाइल फोटो
HighLights
दहेज में कम सामान पर ताना मारना क्रूरता।
दिल्ली हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
पति पर क्रूरता का मुकदमा चलेगा।
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। दहेज से जुड़े वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि दहेज में छोटी कार और कम सोना देने के लिए बार-बार महिला को ताना मारना, तलाक के आधार के तौर पर क्रूरता माना जा सकता है।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने कहा कि शादी के बाद झगड़े में पत्नी को बार-बार दहेज न लाने के लिए ताना मारा गया था और प्रथम दृष्टया दहेज की मांगों के सिलसिले में मृतक को परेशान करने का इशारा करते हैं।
अदालत ने उक्त टिप्पणी करते हुए ट्रायल कोर्ट के निर्णय को कुछ हद तक रद कर दिया। इसमें दोषी पति को भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 498ए (पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता) और 304बी (दहेज हत्या) के तहत अपराधों से बरी कर दिया गया था।
साथ ही पीठ ने कहा कि पति पर दहेज हत्या के बजाय क्रूरता के लिए अभी भी मुकदमा चलना चाहिए। धारा 304बी (दहेज हत्या) के तहत पति को बरी करने के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इन्कार करते हुए पीठ ने उसके खिलाफ धारा 498ए के तहत क्रूरता के आरोप तय करने और ट्रायल आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
पीठ ने नोट किया कि ऐसा कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं था जिससे पता चले कि महिला की मौत से कुछ समय पहले उत्पीड़न हुआ था।
यह मामला 2022 में शादी के एक साल के अंदर एक महिला की मौत से जुड़ा है। याचिका के अनुसार उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में अपने ससुराल की छत कूद कर आत्महत्या कर ली थी।
महिला के पिता ने शिकायत की थी कि दहेज को लेकर उसके पति और ससुराल वाले उसे परेशान कर रहे थे। अदालत ने रिकार्ड पर लिया कि महिला को कहा गया था कि 'तुम्हारे बाप ने तो बड़ी गाड़ी देने की बात की थी लेकिन छोटी गाड़ी के पैसे दिए, जो सोना देने का वादा किया था, वो भी कम दिया।'
पीठ ने ट्रायल कोर्ट की इस राय से असहमति व्यक्त की कि ऐसी बातें इतनी छोटी हैं कि उन्हें क्रूरता नहीं माना जा सकता। पीठ ने कहा कि दहेज को लेकर बार-बार ताने मारना मुकदमे के इस स्तर पर सामान्य कमेंट नहीं माना जा सकता।
