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बार-बार मौका देने पर भी दिल्ली पुलिस ने नहीं दी स्टेटस रिपोर्ट, HC से आरोपी को राहत नहीं; DCP लीगल सेल को भेजा आदेश

Published: Sun, 22 Mar 2026 06:43 PM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस द्वारा बार-बार मौका देने के बावजूद स्थिति रिपोर्ट दाखिल न ...और पढ़ें

अदालत द्वारा बार-बार मौका दिए जाने के बाद भी दिल्ली पुलिस द्वारा स्थिति रिपोर्ट दाखिल न करने पर न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने गहरी चिंता भी जताई।

अदालत द्वारा बार-बार मौका दिए जाने के बाद भी दिल्ली पुलिस द्वारा स्थिति रिपोर्ट दाखिल न करने पर न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने गहरी चिंता भी जताई।

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संक्षेप में पढ़ें

विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। यौन उत्पीड़न, क्रूरता और घरेलू हिंसा के आरोपों के मामले में एक आरोपित की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाया। अदालत द्वारा बार-बार मौका दिए जाने के बाद भी दिल्ली पुलिस द्वारा स्थिति रिपोर्ट दाखिल न करने पर न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने गहरी चिंता भी जताई। पीठ ने कहा कि यह अक्सर देखा जा रहा है कि जमानत के मामलों में स्थिति रिपोर्ट या तो दाखिल ही नहीं की जाती, या फिर उन्हें बस यूं ही सौंप दिया जाता है, जिससे बेवजह सुनवाई टल जाती है।

पीठ को अधिकारियों से क्या कहा?

मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने आला अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की आजादी के मामले को इस तरह से नहीं निपटाया जाना चाहिए। ऐसा लगता है कि पुलिस के आला अधिकारी जमीनी स्तर पर काम करने के इस पहलू से पूरी तरह अनजान हैं। 

अदालत ने उक्त टिप्पणी 2024 में दाखिल की गई अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की। अदालत ने रिकार्ड पर लिया कि अक्टूबर 2024 से याचिका के लंबित होने के बावजूद भी दिल्ली पुलिस द्वारा अपना जवाब दाखिल न करने के कारण आरोपी को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा मिली हुई थी।

स्थिति रिपोर्ट न देने पर उठे सवाल

पीठ ने अतिरिक्त लोक अभियोजक द्वारा व्यक्त की गई उस नाराजगी को भी रिकाॅर्ड पर लिया, जिसमें अभियोजन ने कहा कि उनके बार-बार याद दिलाने के बावजूद जांच अधिकारी और संबंधित एसएचओ ने स्थिति रिपोर्ट नहीं उपलब्ध कराई। पीठ ने कहा कि यह बात बार-बार दोहराई गई है कि कुछ साल पहले जमानत के मामलों में यह एक आम चलन था कि जांच अधिकारी कोर्ट की कार्यवाही शुरू होने से पहले अभियोजक से मिलते थे और उन्हें मामले की पूरी जानकारी देते थे।

जमानत के मामलों में कैसे मिलेगी सहायता?

अदालत ने कहा कि अब यह देखा जा रहा है कि अभियोजकों को पहले से जानकारी देने की बात तो दूर, जांच अधिकारी या तो कोर्ट में पेश ही नहीं होते, या बिना फाइल के आते हैं। उक्त टिप्पणी के साथ साथ ही आदेश की एक प्रति दिल्ली पुलिस के डीसीपी (लीगल सेल) को भेजने का निर्देश दिया ताकि भविष्य में जमानत से जुड़े मामलों की सुनवाई को और अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।

निपटारे की जानकारी होने से इन्कार

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि शिकायतकर्ता के साथ उसके पति और ससुराल वालों ने शारीरिक दुर्व्यवहार किया। उसके पति की जानकारी और समर्थन से उसके देवर ने भी उसका यौन उत्पीड़न किया। आरोपित के वकील ने दलील दी कि यह विवाद वैवाहिक प्रकृति का था और शिकायतकर्ता व आरोपित पति के बीच इसका निपटारा हो चुका है। हालांकि, शिकायतकर्ता के वकील ने जमानत याचिका का विरोध किया और किसी भी तरह के निपटारे की जानकारी होने से इन्कार कर दिया।

पुलिस के रवैये पर पीठ ने कहा...

पीठ ने कहा कि दिल्ली पुलिस का अब तक स्थिति रिपोर्ट दाखिल न करना और कोर्ट व अभियोजक की सहायता के लिए जांच अधिकारी को न भेजना, यह दर्शाता है कि पुलिस इस अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करने में दिलचस्पी नहीं रखती। हालांकि, पुलिस के ऐसे रवैये इस बात का आधार नहीं बन सकते कि कोर्ट आरोपों की गंभीरता को नजरअंदाज कर दे।

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