दिल्ली HC की सख्त टिप्पणी, लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड नीति में देरी पर DDA को 28 सितंबर तक का अल्टीमेटम
दिल्ली हाई कोर्ट ने लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने की नीति को अंतिम रूप देने में देरी पर केंद्रीय आवास मंत्रालय, डीडीए और एलएंडडीओ के रवैये पर नाराजगी व्यक्त की।

दिल्ली हाई कोर्ट।
HighLights
हाई कोर्ट ने लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड नीति में देरी पर नाराजगी जताई।
केंद्रीय मंत्रालय, डीडीए को 28 सितंबर तक नीति सौंपने का निर्देश।
लंबित आवेदनों को भुगतान के समय की नीति के तहत निपटाने का आदेश।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने की नीति को अंतिम रूप देने में देरी के लिए दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, डीडीए और भूमि एवं विकास ऑफिस (एलएंडडीओ) के रवैये पर नाराजगी व्यक्त की।
न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह व न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने अधिकारियों को 28 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई से कम से कम तीन दिन पहले अंतिम नीति तैयार कर अदालत में दाखिल करने का आखिरी मौका दिया।
कोई प्रगति नहीं
अदालत ने कहा कि इस नीति से बड़ी संख्या में प्रभावित नागरिकों को अनिश्चित काल तक इंतजार नहीं कराया जा सकता। पूर्व के आदेश के बावजूद भी कोई प्रगति नहीं होने पर अदालत ने मंत्रालय व विभिन्न एजेंसियों के अधिकारियों के बीच हुई बैठक के मिनट्स (कार्यवृत्त) पर गौर करते हुए कहा कि इनमें किसी भी नीति को लेकर कोई स्पष्टता नहीं दिखाई देती है।
इसके साथ ही अदालत ने मंत्रालय के राजधानी विकास विभाग के सचिव व डीडीए के उपाध्यक्ष को अगली सुनवाई के दौरान कार्यवाही में शामिल होने का निर्देश दिया।
नई नीति भविष्य के लिए लागू
पीठ ने उक्त निर्देश लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड संपत्तियों के कन्वर्जन के लिए डीडीए के पोर्टल से जुड़ी शिकायतों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। यह पोर्टल फरवरी 2026 से आफलाइन है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी नई नीति भविष्य के लिए लागू होगी।
कोर्ट ने बताया कि कन्वर्जन चार्ज जमा होने के बावजूद कई आवेदन लंबित हैं क्योंकि पोर्टल बंद होने के कारण आवेदन की प्रोसेसिंग रुकी हुई है।
155.1 करोड़ जमा किए
पिछले आदेश का जिक्र करते हुए पीठ ने रिकॉर्ड पर लिया कि 1,373 आवेदन लंबित थे और डीडीए ने कन्वर्जन चार्ज के तौर पर 155.1 करोड़ रुपये जमा किए थे।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसे सभी आवेदनों पर पेमेंट के समय लागू नीति के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। लीजहोल्ड प्रॉपर्टी को फ्रीहोल्ड में बदलने का मतलब है संपत्ति और उस पर बनी जमीन का पूरा और स्थायी स्वामित्व प्राप्त करना।
