दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रियदर्शनी विहार के मंदिर को नियमित करने से किया इनकार, मूर्तियां हटाने का आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रियदर्शनी विहार में नर्सरी स्कूल की जमीन पर बने मंदिर को नियमित करने से इनकार कर ...और पढ़ें

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने स्पष्ट कहा कि मंदिर बिना किसी आधिकारिक मंजूरी के सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था।
HighLights
हाई कोर्ट ने मंदिर नियमित करने की याचिका खारिज की।
प्रियदर्शनी विहार में नर्सरी स्कूल की जमीन पर बना मंदिर।
अदालत ने मंदिर से मूर्तियां हटाने का आदेश दिया।
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रियदर्शनी विहार में नर्सरी स्कूल के लिए आवंटित जमीन पर बने मंदिर को नियमित (रेगुलराइज) करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने स्पष्ट कहा कि मंदिर बिना किसी आधिकारिक मंजूरी के सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।
रीति-रिवाजों से मूर्तियां हटाने का निर्देश
अदालत ने जमीन के मूल आवंटन उद्देश्य (नर्सरी स्कूल) का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता संस्था को आदेश दिया है कि वह पूरी श्रद्धा, सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए मंदिर से मूर्तियों को सुरक्षित हटा ले।
1991-92 में हुआ था बिना अनुमति निर्माण
मामले के अनुसार, अमेरिकन एम्बेसी एम्प्लाइज कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी ने मंदिर के लिए डीडीए से जमीन मांगी थी। डीडीए के निर्देश पर एक अलग धार्मिक संस्था का गठन किया गया, लेकिन संस्था ने 1991-92 में बिना भूमि उपयोग (लैंड यूज) बदलवाए और बिना डीडीए की मंजूरी के मंदिर का निर्माण कर लिया।
सुप्रीम कोर्ट/डीडीए नीति का दिया हवाला
हाई कोर्ट ने डीडीए के 2021 के फैसले को बरकरार रखा। सुनवाई के दौरान डीडीए ने कोर्ट में बताया कि 2021 की अधिसूचना के तहत धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उद्देश्यों के लिए सरकारी जमीन का निपटारा केवल नीलामी (ई-ऑक्शन) के जरिए ही हो सकता है।
इस बीच कोर्ट ने अवैध कब्जे को सीधा नियमित करने की मांग खारिज कर दी गई। वहीं, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता संस्था चाहे तो डीडीए की आगामी नीलामी में हिस्सा लेकर मंदिर के लिए वैध रूप से जमीन की बोली लगा सकती है।
