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अगस्ता वेस्टलैंड केस: क्रिश्चियन मिशेल की रिहाई याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

Published: Wed, 18 Mar 2026 02:57 AM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने अगस्ता वेस्टलैंड मामले में बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। ...और पढ़ें

अगस्ता वेस्टलैंड मामले में बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

अगस्ता वेस्टलैंड मामले में बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

HighLights

  1. मिशेल ने अधिकतम सजा पूरी करने पर रिहाई मांगी।

  2. सीबीआई-ईडी ने जालसाजी आरोपों का हवाला दिया।

  3. हाई कोर्ट ने प्रत्यर्पण संधि अनुच्छेद 17 पर निर्णय सुरक्षित रखा।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। अपराधों के लिए अधिकतम सजा पहले ही काट लेने के आधार पर रिहा करने कि मांग को लेकर अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआइपी हेलीकॉप्टर मामले में बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। सभी पक्ष को सुनने के बाद न्यायमूर्ति नवीन चावला व न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ ने निर्णय सुरक्षित रख लिया। मिशेल ने भारत-यूएई प्रत्यर्पण संधि के अनुच्छेद 17 को भी चुनौती दी थी।

सीबीआई, ईडी की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सालिसिटर जनरल (एएसजी) डीपी सिंह और केंद्र के वकील सत्य रंजन स्वैन ने याचिका का विरोध किया। उक्त अनुच्छेद भारत को उन अपराधों के लिए लोगों पर मुकदमा चलाने की अनुमति देता है जिनके लिए प्रत्यर्पण मांगा गया है।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मिशेल को दिसंबर 2018 में संयुक्त अरब अमीरात से 2017 के आरोपपत्र के आधार पर प्रत्यर्पित किया गया था, जिसमें उन पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों, जिनमें लोक सेवक को रिश्वत देना भी शामिल है, लेकिन एजेंसी द्वारा सितंबर 2020 में दायर किए गए आरोपपत्र में जालसाजी के आरोप भी शामिल किए गए थे।

अन्य संबंधित अपराधों के लिए भी मुकदमा चलाने का अधिकार

यह भी तर्क दिया कि मिशेल ने अधिकतम सजा पूरी नहीं की है, क्योंकि उन पर जालसाजी का आरोप है और इसमें आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। उन्होंने आगे कहा कि संधि के अनुच्छेद 17 के तहत उन्हें उन अन्य संबंधित अपराधों के लिए भी मुकदमा चलाने का अधिकार दिया गया है जिनके लिए प्रत्यर्पण की मांग की गई है।

मिशेल ने रिहाई की अर्जी खारिज करने के ट्रायल कोर्ट के सात अगस्त 2025 के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
मिशेल की तरफ से पेश हुए वकील अलजो के. जोसेफ ने दावा किया था कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों के लिए मिशेल पर 2017 में आरोपपत्र दायर किया गया था और वह पहले ही पांच साल की सजा काट चुके हैं।

बाद में, एजेंसी ने संधि के अनुच्छेद 17 के तहत पूरक आरोपपत्रों के माध्यम से आईपीसी की धारा 467 लागू की, जिसमें आजीवन कारावास का प्रविधान है।

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