महिपालपुर में जलभराव-जाम पर दिल्ली हाई कोर्ट नाराज, एजेंसियों से पूछा- जिम्मेदारी कौन लेगा?
दिल्ली हाई कोर्ट ने महिपालपुर में जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या पर एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट। फाइल फोटो
HighLights
महिपालपुर में जलभराव व जाम पर हाई कोर्ट की कड़ी नाराजगी।
एजेंसियों पर जिम्मेदारी तय न करने और देरी का आरोप।
मुख्य सचिव को समाधान व जिम्मेदारियों पर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। आइजीआइ एयरपोर्ट और गुरुग्राम जाने वाली सड़क के पास महिपालपुर इलाके में बार-बार होने वाले जलभराव व जाम की समस्या पर दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाया है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ), दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) और दूसरी एजेंसियों को फटकार लगाते हुए न्यायामूर्ति प्रतिबा एम. सिंह व न्यायामूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने कहा कि कई बैठकों और कागजी कार्रवाई के बावजूद समस्या हल करने के लिए न तो किसी की जिम्मेदारी तय की गई और न ही समयसीमा।
गंभीरता से कदम उठाएं एजेंसियां
पीठ ने कहा कि महिपालपुर में जलभराव की तस्वीरों को देखकर इन एजेंसियों को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि कोई भी एजेंसी जलभराव या ट्रैफिक जाम की समस्या को ठीक करने की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।
उक्त टिप्पणियों के साथ पीठ ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को बैठकें जारी रखने और अगली सुनवाई तक एक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि रिपोर्ट में शार्ट-टर्म और लान्ग-टर्म उपायों और हर उपाय के लिए जिम्मेदार एजेंसी या संस्था की जानकारी होनी चाहिए।
मामले की सुनवाई 30 अक्टूबर के लिए तय करते हुए कोर्ट ने जिम्मेदारी सौंपी गई एजेंसियों को भी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। पीठ ने कहा कि रिपोर्ट में उठाए जाने वाले कदमों और उनके लिए तय समय-सीमा की जानकारी होनी चाहिए।
एनजीओ सोशल जूरिस्ट की याचिका पर अदालत सुनवाई करते हुए पूर्व में अदालत ने इलाके में बरसाती पानी निकासी की व्यवस्था बनाने की संभावना की जांच करने का निर्देश दिया था।
इंटीग्रेटेड ड्रेनेज कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने का निर्देश
उक्त निर्देश पर दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कई बैठकें हुईं थीं और मुख्य सचिव ने बड़े पैमाने पर ढ़ांचागत योजनाओं पर काम कर रही एजेंसियों को इंटीग्रेटेड ड्रेनेज कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।
हालांकि, अदालत ने पाया कि चार अगस्त से सात सितंबर के बीच हुई बैठकों में बहुत सारा कागजी काम तो हुआ, लेकिन जमीनी स्तर पर यह तय नहीं किया गया कि कौन सा काम किस एजेंसी या कंपनी को करना है।
