थाईलैंड कछुआ तस्करी मामला: दिल्ली HC का मुरुगेसन मणिवन्नन को रिहा करने का आदेश, भारत में ही चलेगी CBI जांच
दिल्ली हाई कोर्ट ने थाईलैंड में 840 रेडिएटेड कछुओं की तस्करी मामले में वांछित मुरुगेसन मणिवन्नन को रिहा करने का ...और पढ़ें
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थाईलैंड में 840 रेडिएटेड कछुओं को आयात करने के मामला। AI जनरेटेड
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने मुरुगेसन मणिवन्नन को रिहा करने का आदेश दिया।
केंद्र ने थाईलैंड प्रत्यर्पण से इनकार कर सीबीआई को मामला सौंपा।
मणिवन्नन 2012 में 840 रेडिएटेड कछुओं के साथ पकड़ा गया था।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने थाईलैंड में 840 रेडिएटेड कछुओं को आयात करने के मामले में वांछित अपराधी मुरुगेसन मणिवन्नन को रिहा करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने थाईलैंड प्रत्यर्पण की कार्यवाही से भी उसे मुक्त कर दिया। केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि मणिवन्नन को थाईलैंड प्रत्यर्पित नहीं किया जा रहा है और मामले में भारत में स्थानीय स्तर पर मुकदमा चलाने के लिए इसे सीबीआई को भेजा गया है।
हिरासत जारी नहीं रखी जा सकती
न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने कहा कि जब सरकार का स्पष्ट रुख है कि याचिकाकर्ता को थाईलैंड प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा, तो प्रत्यर्पण के आदेश के तहत उसकी हिरासत जारी नहीं रखी जा सकती।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि किसी अन्य मामले में उसकी जरूरत नहीं है तो उसे जेल से तत्काल रिहा किया जाए।
भारत से बाहर नहीं भेजा गया
मणिवन्नन को छह जनवरी 2026 को पटियाला हाउस कोर्ट ने थाईलैंड प्रत्यर्पित किए जाने तक जेल में रखने का आदेश दिया था। हालांकि, प्रत्यर्पण आदेश के दो माह के भीतर उसे भारत से बाहर नहीं भेजा गया।
याचिकाकर्ता ने इसी आधार पर कहा था कि छह मार्च 2026 के बाद उसकी हिरासत प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 की धारा 24 और संविधान के अनुच्छेद 21 के खिलाफ है।
840 कछुओं के साथ थाईलैंड में पकड़ा गया था
थाईलैंड के प्रत्यर्पण अनुरोध के मुताबिक मणिवन्नन को 27 अगस्त 2012 को बैंकाक के सुवर्णभूमि एयरपोर्ट पर 840 रेडिएटेड कछुओं के साथ गिरफ्तार किया गया था। उस पर थाईलैंड के वन्यजीव संरक्षण एवं सुरक्षा अधिनियम, पशु महामारी अधिनियम और सीमा शुल्क अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए थे। इन अपराधों में एक वर्ष से अधिक की सजा का प्रविधान था।
वहीं, जांच के बाद अभियोजन पक्ष ने आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन तय हिरासत अवधि में उसके खिलाफ मुकदमा शुरू नहीं हो सका। इसके बाद उसे रिहा कर दिया गया और वह थाईलैंड से भागकर भारत लौट आया। उसके खिलाफ चार अप्रैल 2014 को गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया।
