विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ट्रेन में मौत पर 11 साल बाद पिता को मिला न्याय

Published: Sun, 13 Sep 2026 06:56 PM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने चलती ट्रेन में यात्री के गिरने से हुई मौत को रेलवे अधिनियम के तहत एक अनहोनी ...और पढ़ें

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से रेलवे को झटका।

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से रेलवे को झटका।

HighLights

  1. दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रेन में गिरने से हुई मौत को अनहोनी माना।

  2. 11 साल बाद पिता को बेटे की मौत पर न्याय मिला।

  3. रेलवे को दो महीने में मुआवजा देने का आदेश दिया गया।

विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। चलती ट्रेन में अचानक झटका लगने से गिरकर एक युवक की मौत के मामले में एक पिता को 11 साल की लंबी कानूनी लड़ने के बाद आखिरकार न्याय मिला है। दिल्ली हाई कोर्ट ने चलती ट्रेन में ऊपरी सीट से यात्री का गलती से गिरने को रेलवे अधिनियम-1989 के तहत एक अनहोनी घटना माना है।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी की पीठ ने पीड़ित स्वजन के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए मुआवजा के दावे को खारिज करने वाले रेलवे दावा न्यायाधिकरण के आदेश को रद कर दिया। अदालत ने कहा कि मुआवजा को इसे सिर्फ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दिल का दौरा बताया गया है।

मामले को दोबारा से सूचीबद्ध करने का आदेश

साथ ही अदालत ने मामले को ट्रिब्यूनल के पास वापस भेजते हुए अपीलकर्ताओं पिता श्याम सिंह को दिए जाने वाले मुआवजे का आकलन कर दो महीने के अंदर मुआवाजा देने का आदेश दिया। अदालत ने मामले को 30 सितंबर को रेलवे दावा न्यायाधिकरण के समक्ष मामले को दोबारा से सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।

याचिका के अनुसार 10 नवंबर 2015 को संजीव कुमार अपने पिता श्याम सिंह के साथ ट्रेन नंबर 64157 (इटावा-आगरा कैंट शटल) में इटावा से आगरा कैंट की यात्रा कर रहे थे। उनके पास एक वैध सेकंड-क्लास टिकट था और रिकार्ड के अनुसार जब ट्रेन आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के पास पहुंची तो ऊपरी सीट पर बैठे संजीव चलती ट्रेन में अचानक झटके के कारण नीचे से गिर गए। गिरने पर वह बेहोश हो गए और अस्पताल ले जाने पर रेलवे डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मौत को दिल का दौरा पड़ने का स्वाभाविक कारण बताया

बाद में आगरा के जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम किया गया। रेलवे दावा न्यायाधिकरण ने मुआवजे के दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि संजीव की मौत अनहोनी घटना के बजाय दिल का दौरा पड़ने के कारण यह स्वाभाविक मौत थी।

अनहोनी घटना के पहलू पर विचार करते हुए पीठ ने माना कि ऐसी घटना में ट्रेन के अंदर यात्री का गिरना भी शामिल हो सकता है और कानून के मुताबिक यात्री का ट्रेन से बाहर गिरना जरूरी नहीं है। उक्त तथ्यों को देखते हुए पीठ ने पाया कि घटना के समय के रेलवे रिकार्ड से गलती से गिरने की बात साबित होती है।

अदालत ने कहा कि ऐसा कोई दस्तावेज या मेडिकल सुबूत नहीं था जिससे यह साबित हो सके कि संजीव को पहले से दिल की कोई बीमारी थी।

यह भी पढ़ें- दिल्ली के पूर्ण गुरसिख परिवारों के बच्चों की स्कूल फीस भरेगी DSGMC, कमेटी ने दी प्रस्ताव को मंजूरी