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दिल्ली HC का फैसला: स्त्रीधन वसूली के लिए हिरासत में पूछताछ अनावश्यक, 80 वर्षीय ससुर को अग्रिम जमानत

Published: Wed, 30 Sep 2026 05:27 AM (GMT+05:30)

दिल्ली हाई कोर्ट ने यौन उत्पीड़न के आरोपी 80 वर्षीय ससुर को अग्रिम जमानत दी, कहा कि स्त्रीधन की वसूली ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. 80 वर्षीय ससुर को यौन उत्पीड़न मामले में अग्रिम जमानत मिली।

  2. स्त्रीधन वसूली हेतु हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं: हाई कोर्ट।

  3. जांच अधिकारी के मौखिक नोटिस के दावे पर कोर्ट ने सवाल उठाए।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपित 80 वर्षीय आरोपित ससुर को अग्रिम जमानत देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि सिर्फ स्त्रीधन (महिला की निजी संपत्ति) की रिकवरी के लिए हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है, क्योंकि ऐसी रिकवरी जमानत देने वाली अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती।

साथ ही न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने जांच अधिकारी के उस दावे पर भी सवाल उठाया कि एक बुजुर्ग आरोपी जांच में शामिल नहीं हुआ था। अदलात ने रिकार्ड पर लिया कि नोटिस जबानी तौर पर दिए गए थे और कोई केस डायरी पेश नहीं की गई थी।

80 साल के ससुर को अग्रिम जमानत

पीठ ने उक्त टिप्पणी लगभग 80 साल के ससुर को अग्रिम जमानत देते हुए की। यह मामला वैवाहिक विवाद से जुड़ा है और इसमें भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

शिकायतकर्ता ने स्त्रीधन की रिकवरी के लिए कोई उचित कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं की थी। प्राथमिकी शुरू में शिकायतकर्ता ने अपने ससुर के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

अदालत ने रिकार्ड पर लिया कि जांच अधिकारी ने शुरू में कहा था कि बार-बार नोटिस देने के बावजूद आरोपित जांच में शामिल नहीं हुआ। हालांकि, जब नोटिस दिखाने के लिए कहा गया, तो अधिकारी ने कहा कि वे जबानी तौर पर दिए गए थे।

कोर्ट ने आगे कहा कि नोटिस से जुड़ी कोई केस डायरी पेश नहीं की गई और जांच अधिकारी की कार्रवाई भरोसे के लायक नहीं लगी। हिरासत में पूछताछ के मुद्दे पर, कोर्ट ने गौर किया कि इसका एकमात्र मकसद शिकायतकर्ता के स्त्रीधन की रिकवरी बताया गया था।

पीठ ने कहा कि इस मकसद के लिए हिरासत में पूछताछ बिल्कुल भी जरूरी नहीं है। कोर्ट ने आगे कहा कि स्त्रीधन न लौटाने का मामला उसकी रिकवरी के लिए जमानत देने वाली अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

प्राथमिकी के अनुसर शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपित ने कई बार उसका यौन उत्पीड़न किया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की। हालांकि, आरोपित ने तर्क दिया कि उसके बेटे (जो शिकायतकर्ता का पति है) पर उनके वैवाहिक विवाद के सिलसिले में दबाव बनाने के लिए आरोप लगाए गए थे।

अभियोजन पक्ष ने अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि हिरासत में पूछताछ अधिक असरदार होती है और जांच अभी शुरुआती चरण में है। हालांकि, पीठ ने रिकार्ड पर लिया कि यौन अपराध मई 2022 या उससे पहले हुए बताए गए, जबकि प्राथमिकी 29 अप्रैल 2026 को हुई थी।

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