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ज्यादा फीस लगाने को दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और एनजीटी को जारी नोटिस

Published: Sun, 19 Apr 2026 07:06 PM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने एनजीटी में आवेदन और अपील दाखिल करने पर लगने वाली अत्यधिक फीस को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और एनजीटी से जवाब मांगा है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने एनजीटी में आवेदन और अपील दाखिल करने पर लगने वाली अत्यधिक फीस को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और एनजीटी से जवाब मांगा है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने एनजीटी में आवेदन और अपील दाखिल करने पर लगने वाली अत्यधिक फीस को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और एनजीटी से जवाब मांगा है। 

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के समक्ष आवेदन, अपील और अन्य विविध आवेदन दाखिल करने के लिए बहुत ज्यादा फीस लगाने को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार व एनजीटी से जवाब मांगा है। याचिका पर मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ-साथ एनजीटी को नोटिस जारी कर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ता अजय दुबे ने याचिका में एनजीटी (प्रैक्टिसेस एंड प्रोसीजर) नियम-2011 के अलग-अलग प्रविधानों के साथ-साथ एक कार्यालय आदेश भी चुनौती दी है। इसके तहत अतिरिक्त प्रिंटिंग चार्ज लगाए गए हैं। याचिका के अनुसार नियम 12(दो) के तहत एनजीटी में आवेदन या अपील दाखिल करने के लिए 1000 रुपये की फीस तय है, जबकि नियम 12(दो ए) के तहत हर विविध आवेदन के लिए कम से कम 500 रुपये की फीस जरूरी है, चाहे वह किसी भी तरह का हो।

इसमें आगे यह भी आरोप लगाया गया है कि 2019 के आफिस आर्डर के तहत हर 25 पन्नों पर 100 रुपये का प्रिंटिंग खर्च लगाया जाता है, भले ही आवेदन आनलाइन ही क्यों न दाखिल किया गया हो। अजय दुबे ने कहा है कि इन प्रविधानों की वजह से मध्य प्रदेश के सिंगरौली में एक कोयला खनन प्रोजेक्ट से जुड़े पर्यावरण से जुड़े मुकदमे को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें शुरुआती चरण में ही लगभग 8,200 रुपये देने पड़े।

याचिका में कहा गया है, आखिरकार याचिकाकर्ता को जो खर्च और फीस देनी पड़ी, वह इतनी ज्यादा और उनकी पहुंच से बाहर हो गई कि याचिकाकर्ता के लिए एनजीटी में जनहित से जुड़े मुकदमे को आगे बढ़ाना नामुमकिन हो गया।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि एनजीटी की प्रधान पीठ अब आनलाइन आवेदन दाखिल करने का अनिवार्य तरीका अपनाया जाता है और आफलाइन या कागजी तौर पर आवेदन दाखिल करने का तरीका पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है।

याचिका में कहा गया है कि इस तरह की बहुत ज्यादा फीस पर्यावरण से जुड़े सच्चे और नेक इरादे वाले मुकदमों को हतोत्साहित करती है, और जंगलों, वन्यजीवों और पर्यावरण की रक्षा करने की सरकार की जिम्मेदारी को कमजोर करती है।

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