दिल्ली हौजरानी अग्निकांड: पीड़िता बोली- 'बहुत भयानक था वो खौफनाक मंजर, याद कर आज भी सिहर जाती हूं'
सामया, जो हौजरानी के अवैध होटल में 3 जून को लगी आग की घटना में जीवित बची थीं, ने उस ...और पढ़ें
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हौजरानी अग्निकांड: सामया, बांग्लादेश। - सौ. पुलिस
HighLights
सामया ने हौजरानी आग की भयावह घटना याद की।
अवैध होटल में लगी आग में दो परिजन खोए।
सरकार से मदद न मिलने पर जताई निराशा।
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। आंख खुली तो चारों तरफ धुआं ही था। कुछ नजर नहीं आ रहा था। जान बचाने के लिए कमरे से बाहर निकले। घने काले धुएं के गुबार के बीच न तो सीढ़ी दिख रही थी और न ही बाहर निकलने का कोई रास्ता।
दम घुटने लगा। लगा कि हम जिंदा ही नहीं बचेंगे। थोड़ी ही देर में हम बेहोश होकर गिर पड़े। जब आंख खुली तो खुद को अस्पताल के बेड पर पाया। ऑक्सीजन लगी थी। होश संभाला तो पता चला कि परिवार के दो लोगों की हादसे में मौत हो चुकी है।
एक सप्ताह तक उन्हें होश ही नहीं था
3 जून को हौजरानी के अवैध होटल में लगी आग की घटना को याद कर बांग्लादेश की सामया आज भी सिहर उठती हैं। घटना के बाद एक सप्ताह तक उन्हें होश ही नहीं था। हालत इतनी गंभीर थी कि तीन दिनों तक उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। मैक्स अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद शनिवार को दोपहर बाद वे मालवीय नगर थाने में अपना सामान लेने पहुंची थीं।
वे बताती हैं कि बंगलादेश से अपने परिवार के कुल पांच लोगों के साथ मैक्स अस्पताल में इलाज कराने पहुंचीं थी। 2 जून को हौजरानी के अवैध होटल फ्लोरिश स्टे में चौथी मंजिल पर दो रूम बुक किया था।
3 जून की सुबह जब होटल में आग लगी, उस समय सभी उसी होटल में थे। वे बताती हैं कि सुबह उनके मामा नीचे गए थे। रेस्त्रां के किचन में रसोइया काम कर रहा था कि इस बीच आग लग गई। वे भागकर हमें बचाने ऊपर आए। थोड़ी ही देर में धुआं ऊपर आने लगा।
खिड़की का कांच तोड़ने की कोशिश की
हम लोगों ने खिड़की का कांच तोड़ने की कोशिश की, पर वो बहुत मजबूत थी। बड़ी मुश्किल से एक कांच टूट पाया। सभी लोग खुद को बचाने के लिए चिल्ला रहे थे। हमें बचाने कोई नहीं आ रहा था। धुआं ज्यादा आने लगा। घबराकर हम लोग पानी पीने लगे। सांस नहीं ले पा रहे थे। लगा कि अब जिंदा नहीं बच पाएंगे।
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हादसे में सामया ने अपनी मामी रिहान व उनके भाई नूर आलम को खो दिया। उनकी शिकायत थी कि सरकार से कोई मदद नहीं मिल पाई। उनके परिवार के दो लोगों के मौत के बाद उनके शवों को बंगलादेश ले जाने के लिए मोटा पैसा वसूला गया, जबकि सरकार ने एलान किया था कि यह नि:शुल्क होगा।
