दिल्ली में 2.7 लाख CCTV कैमरों के नेटवर्क का होगा बड़ा ओवरहाॅल, पुराने चीनी कैमरे हटेंगे; निगरानी होगी स्मार्ट
दिल्ली सरकार लोक निर्माण विभाग (PWD) के माध्यम से राजधानी के 2.7 लाख CCTV कैमरों के नेटवर्क की समीक्षा और ...और पढ़ें

दिल्ली सरकार अपने सीसीटीवी निगरानी नेटवर्क का व्यापक आधुनिकीकरण करेगी। फाइल फोटो
HighLights
1.4 लाख पुराने चीनी कैमरे बदले जाएंगे
2.7 लाख CCTV नेटवर्क की होगी व्यापक समीक्षा
AI तकनीक से निगरानी और कवरेज में सुधार होगा
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। राजधानी में लगे CCTV कैमरों की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। लोक निर्माण विभाग (PWD) पूरे शहर में लगे लगभग 2.7 लाख CCTV कैमरों के नेटवर्क की समीक्षा और ओवरहाल करने की योजना बना रहा है। इस प्रक्रिया में कैमरों की पोजिशनिंग, एंगल, कार्यस्थिति और कवरेज की जांच की जाएगी ताकि निगरानी व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सके।
दिल्ली में कितना बड़ा है CCTV नेटवर्क
दिल्ली में PWD द्वारा दो चरणों में कैमरे लगाए गए हैं।
- फेज-1: लगभग 1.40 लाख कैमरे
- फेज-2: लगभग 1.33 लाख कैमरे
- कुल: करीब 2,73,821 CCTV कैमरे
इन कैमरों को मुख्य सड़कों, चौराहों, रिहायशी कॉलोनियों, मोहल्लों और बाजारों में लगाया गया है।
पहले चरण के चीनी कैमरे हो चुके हैं पुराने, बदले जाएंगे
पिछले कुछ वर्षों में 2018 से शुरू होकर सरकार ने दो चरणों में पूरे शहर में लगभग कैमरे लगाए हैं। हालांकि, PWD ने बताया कि पहले चरण में लगाए गए कई कैमरों का परिचालन जीवनकाल अब समाप्त होने वाला है, और अब उन्हें बदलने का समय आ गया है।
PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा, "पहले चरण में लगाए गए कई कैमरे अब पुराने हो रहे हैं। सुरक्षा से जुड़ी चिंताएँ भी हैं, क्योंकि ये SIM-आधारित चीनी कैमरे हैं। इसलिए, जब भी जरूरत होगी, हम उन्हें नए कैमरों से बदल देंगे।"
और कैमरे लगाने से पहले, सरकार मौजूदा PWD CCTV नेटवर्क का व्यापक अध्ययन करने के लिए एक विशेषज्ञ सलाहकार नियुक्त करने की योजना बना रही है।
"यह अध्ययन सिस्टम का एक नए दृष्टिकोण से विश्लेषण करेगा, जिसमें इसके इष्टतम उपयोग, वास्तविक ज़रूरतों और अपराध की रोकथाम में इसकी भूमिका को बढ़ाने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस समीक्षा में यह भी देखा जाएगा कि क्या कैमरे पूरे शहर में समान रूप से वितरित हैं।"
ओवरहाल की जरूरत क्यों पड़ी?
सर्वे और शिकायतों के आधार पर कई समस्याएं सामने आई हैं:
- कुछ जगहों पर लोगों ने कैमरों का एंगल बदल दिया गया है, जिससे वे सार्वजनिक स्थानों के बजाय निजी घरों या पार्किंग पर फोकस करने लगे।
- पहले चरण में लगाए गए कई कैमरे अब अपनी ऑपरेशनल लाइफ पूरी कर चुके हैं।
- कई जगह एक ही मॉडल के कैमरे लगाए गए थे, जो हर लोकेशन के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
- पिछले सर्वे में 7,500 से ज्यादा कैमरे खराब पाए गए।
- कुछ इलाकों में कैमरों की संख्या ज्यादा है, जबकि कई जगह निगरानी कम है।
कुछ इलाकों में कैमरों की संख्या बहुत ज्यादा
उन्होंने आगे कहा, "कुछ इलाकों में कैमरों की संख्या बहुत ज्यादा है, जबकि अन्य जगहों पर अभी भी पर्याप्त निगरानी कवरेज की कमी है। यह अध्ययन कैमरों के कोणों में संभावित बदलावों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ बेहतर डेटा साझा करने के तरीकों पर भी विचार करेगा।"
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में कुछ इलाकों में कई एजेंसियाँ CCTV कैमरे संचालित करती हैं, जिससे संसाधनों के दोहराव और कैमरों के कम उपयोग को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। प्रस्तावित मूल्यांकन में यह जाँच की जाएगी कि क्या सार्वजनिक सुरक्षा विभाग द्वारा लगाए गए कैमरे अपने इच्छित उद्देश्य को प्रभावी ढंग से पूरा कर रहे हैं।
"सरकार का अब लक्ष्य CCTV नेटवर्क का ध्यान केवल सबूत रिकॉर्ड करने से हटाकर, सक्रिय रूप से अपराध की रोकथाम पर केंद्रित करना है," मंत्री ने आगे कहा। "स्थापना के अगले चरण की व्यापक योजना में पुलिस के लिए फुटेज तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना और एक अधिक विस्तृत, पूरे शहर में फैली निगरानी प्रणाली विकसित करना शामिल है।"
कैसे होगा पूरा रिव्यू?
सरकार सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में व्यापक सर्वे कराएगी। इस प्रक्रिया में:
- कैमरों की सटीक लोकेशन और कवरेज एरिया की जांच होगी।
- कैमरों के एंगल और दिशा का अध्ययन किया जाएगा।
- टैम्परिंग या छेड़छाड़ के मामलों को चिन्हित किया जाएगा।
- जहां कैमरे डुप्लिकेट या ओवरलैप कर रहे हैं, उन्हें सुधारा जाएगा।
- जहां निगरानी कम है, वहां नए कैमरे लगाए जाएंगे।
इस समीक्षा में MLA, नगर निगम पार्षद, आरडब्ल्यूए और पुलिस की भी भागीदारी होगी।
मरम्मत और नए कैमरों की योजना
सर्वे के बाद:
- खराब या एक्सपायर कैमरों को बदला जाएगा।
- गलत एंगल या कम उपयोग वाले कैमरों को दोबारा सही जगह लगाया जाएगा।
- जरूरत के अनुसार नई तकनीक वाले हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे लगाए जाएंगे।
- सड़कों और चौराहों के लिए वाइड-एंगल कैमरे इस्तेमाल किए जाएंगे।
AI तकनीक का भी इस्तेमाल
कैमरों की कवरेज और दोहराव का पता लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का उपयोग किया जाएगा, जिससे निगरानी नेटवर्क को अधिक स्मार्ट बनाया जा सके।
