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दिल्ली: यमुना की सफाई के लिए दिल्ली सरकार का 'एक्शन प्लान', गंदे पानी को रोकने के लिए बनी ठोस रणनीति

Published: Mon, 11 May 2026 10:09 PM (IST)

दिल्ली सरकार ने यमुना में गंदे पानी के प्रवेश को रोकने के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं।

दिल्ली सरकार ने यमुना में गंदे पानी के प्रवेश को रोकने के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। इमेज एआई

दिल्ली सरकार ने यमुना में गंदे पानी के प्रवेश को रोकने के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। इमेज एआई

HighLights

  1. यमुना में गंदे पानी रोकने के प्रयास तेज।

  2. सीईटीपी और डीएसटीपी की कार्यक्षमता पर जोर।

  3. साहिबी नदी (नजफगढ़ नाला) की सफाई पर ध्यान।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। वर्षों से गंदगी का सामना कर रही यमुना की सफाई को लेकर सोमवार को जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के साथ बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने यमुना में गंदे पानी को रोकने के लिए अपने प्रयास और तेज कर दिए हैं। यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए अब ठोस और समन्वित रणनीति पर काम हो रहा है। बैठक में कामन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स (सीईटीपी) की भूमिका और उनकी कार्यक्षमता की विस्तार से समीक्षा की गई।

जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के अनुसार बैठक में यह सामने आया कि औद्योगिक कचरा यमुना प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से एक है। ऐसे में सीईटीपी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि ये वह व्यवस्था है जहां प्रदूषित पानी को नदी में जाने से पहले ही ट्रीट किया जा सकता है। बैठक में सीईटीपी को और अधिक मजबूत करने और उनकी निगरानी को सख्त बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि अगर सीईटीपी सही ढंग से काम करें, तो यमुना को पुनर्जीवित होने का वास्तविक मौका मिल सकता है। सरकार उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।उन्होंने बताया कि सरकार यमुना सफाई के लिए बहु-स्तरीय योजना पर काम कर रही है। इसके तहत सैकड़ों करोड़ रुपये की परियोजनाओं को लागू किया जा रहा है, जिनमें नए डीसेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (डीएसटीपी) की स्थापना और मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का उन्नयन शामिल है।

ये डीएसटीपी प्रमुख नालों पर लगाए जाएंगे ताकि स्रोत पर ही सीवेज का उपचार किया जा सके और बिना ट्रीटमेंट का पानी यमुना में जाने से रोका जा सके। इसके साथ ही, ‘साहिबी नदी’ (नजफगढ़ नाला), जो यमुना में प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत है, उसकी सफाई और सुधार के लिए अत्याधुनिक मशीनरी तैनात की गई है।

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