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दिल्ली में पॉल्यूशन पर तीन तरफ से वार, इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा बढ़ेगा; प्रदूषणकारी मालवाहक वाहनों पर सख्ती

Published: Mon, 28 Sep 2026 04:00 AM (IST)

दिल्ली वायु प्रदूषण से निपटने के लिए तीन-तरफा रणनीति अपना रहा है, जिसमें सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना, बसों और ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. सार्वजनिक परिवहन को मजबूत कर प्रदूषण कम करने की रणनीति।

  2. दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा तेजी से बढ़ाया जा रहा है।

  3. प्रदूषणकारी बीएस-3, बीएस-4 मालवाहक वाहनों पर सख्त प्रतिबंध।

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली में वायु प्रदूषण और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने की रणनीति अब तीन मोर्चों पर आगे बढ़ रही है—सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना, बसों एवं अन्य वाहनों को बिजली आधारित बनाना और प्रदूषणकारी व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश पर सख्ती।

सरकारी आंकड़ों से यह तस्वीर सामने आती है कि बस बेडे में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ी है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन को निजी वाहनों का पर्याप्त विकल्प बनाने के लिए अभी सेवा विस्तार और नियमितता अहम चुनौती है।

बसों में बड़ा बदलाव

दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन में बस और मेट्रो दो प्रमुख आधार हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार मार्च 2026 में डीटीसी और परिवहन विभाग की कुल बस संख्या 6,100 थी। इनमें 4,338 इलेक्ट्रिक बसें थीं—2,750 बारह मीटर और 1,588 नौ मीटर की।

वहीं डीएमआरसी की औसत दैनिक सवारी करीब 67 लाख थी। डीटीसी की योजना इससे आगे जाने की है। उसके आधिकारिक ई-बस आगमन कार्यक्रम में 2026 में 2,345 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने और 2026-27 में आगे 2,800 बसों की योजना दर्ज है। अगस्त में डीटीसी ने 200 इलेक्ट्रिक बसों के उद्घाटन से संबंधित सूचना भी जारी की थी।

सिर्फ बस बदलने से नहीं बनेगी व्यवस्था

चुनौती यह है कि बसों की संख्या बढ़ने के साथ उनके रूट, फेरे और उपलब्धता भी बढ़े। मार्च 2026 तक डीटीसी करीब 517 इलाकों और 15 एनसीआर मार्गों पर औसतन 32,525 फेरे प्रतिदिन चला रही थी और करीब 24.29 लाख यात्रियों को प्रतिदिन सेवा दे रही थी।

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यानी दिल्ली के लिए इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के साथ उनका अधिकतम उपयोग और यात्रियों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

वाहनों को बिजली में बदलने की नीति

दिल्ली की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति में सार्वजनिक परिवहन के साथ स्कूल बसों, डिलीवरी वाहनों और सरकारी वाहनों के विद्युतीकरण पर भी जोर है। नीति के तहत नए अंतर-शहरी बसों को इलेक्ट्रिक रखने का प्रविधान है। सरकारी विभागों द्वारा खरीदे या किराये पर लिए जाने वाले नए एन-1 ट्रक भी इलेक्ट्रिक रखने का प्रविधान किया गया है।

बाहर से आने वाले भारी वाहनों पर सख्ती

व्यावसायिक मालवाहक वाहनों के मामले में भी नियम कड़े हुए हैं। सीएक्यूएम के अनुसार एक नवंबर 2025 से दिल्ली में बाहर से आने वाले बीएस-3 और उससे पुराने मालवाहक वाहन प्रतिबंधित हैं।

बीएस-4 मालवाहक वाहनों को 31 अक्टूबर 2026 तक सीमित अवधि की अनुमति दी गई है। इसके बाद स्वच्छ ईंधन और बेहतर उत्सर्जन मानक वाले वाहनों की भूमिका और बढ़ेगी।

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इस तरह दिल्ली में दिशा स्पष्ट रूप से कम प्रदूषण वाले सार्वजनिक परिवहन और स्वच्छ माल परिवहन की ओर है। लेकिन असली कसौटी यह होगी कि इलेक्ट्रिक बसों की बढ़ती संख्या के साथ यात्रियों को कितनी नियमित, सुविधाजनक और व्यापक सेवा मिलती है और प्रतिबंधित वाहनों की निगरानी सीमाओं पर कितनी प्रभावी रहती है।

स्वच्छ वायु की दिशा में तकनीकी बदलाव महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जब तक नगरों की यातायात व्यवस्था पूरी तरह सुचारु और सर्वसुलभ नहीं बनती, तब तक प्रदूषण की रोकथाम अधूरी रहेगी। निजी गाड़ियों की निर्भरता को कम करने के लिए आवश्यक है कि सार्वजनिक परिवहन सुलभ, विश्वसनीय और व्यापक हो। इसके साथ ही, पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक अवसंरचना विकसित की जाए।

यदि दिल्ली और एनसीआर के सभी शहर मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाएं तो न केवल वायु प्रदूषण में भारी कमी लाई जा सकती है, बल्कि नागरिकों का जीवन भी अधिक सहज, सुरक्षित और स्वच्छ बन सकता है।

- अनुमिता राय चौधरी, कार्यकारी निदेशक, सेंटर फार साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई)