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विशेष अभियान चलाने के बाद भी दिल्ली में यमुना क्यों है प्रदूषित? रिपोर्ट में समझिए नदी में कहां से आती है गंदगी

Published: Wed, 14 Jan 2026 05:27 AM (IST)Updated: Wed, 14 Jan 2026 05:59 AM (IST)

दिल्ली में यमुना की सफाई अभियान के बावजूद स्थिति नहीं सुधर रही है, मुख्य कारण प्रदूषित नाले हैं। डीपीसीसी की ...और पढ़ें

दिल्ली में यमुना नदी में बढ़ा प्रदूषण।

दिल्ली में यमुना नदी में बढ़ा प्रदूषण।

HighLights

  1. 17 बड़े नालों में से आठ में बीओडी 100 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक

  2. अबुल फजल नाला को छोड़कर नदी में गिरने वाले अन्य सभी नाले प्रदूषित

  3. जल बोर्ड 2027 तक नालों के पानी का एसटीपी में उपचार करेगा

संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। यमुना को साफ करने के लिए विशेष अभियान चलाने के बाद भी स्थिति बहुत अधिक नहीं सुधरी है। इसका मुख्य कारण इसमें गिरने वाले नाले हैं। दिल्ली में लगभग 200 छोटे बड़े नाले नदी में गिरते हैं। इनमें से 17 बड़े नालों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर, 2024 की तुलना में इस बार दिसंबर में कई नालों का पानी अधिक दूषित हुआ है। इससे यमुना और मैली हो रही है। इन्हें साफ किए बिना यमुना को स्वच्छ नहीं किया जा सकता है।

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नजफगढ़ नाला। आर्काइव

नाले का पानी को लेकर क्या है मानक?

अबुल फजल को छोड़कर यमुना में गिरने वाले किसी भी बड़े नाले का पानी मानक के अनुरूप नहीं है। नजफगढ़, महारानी बाग, जैतपुर और साहिबाबाद नाले की स्थिति में ही कुछ सुधार है। अन्य की स्थिति ठीक नहीं है। तय मानक के अनुसार जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) 30 मिलीग्राम (एमजी) प्रति लीटर से अधिक नहीं होना चाहिए।

आठ नालों में यह 100 मिलीग्राम (एमजी) प्रति लीटर से अधिक है। प्रदूषण बढ़ने से नालों का रासायनिक आक्सीजन मांग (सीओडी) में भी अधिक वृद्धि हुई है। उच्च सीओडी का अर्थ है कि पानी में अधिक कार्बनिक पदार्थ मौजूद हैं, जो पानी में घुलित आक्सीजन (डीओ) को कम और बीओडी को बढ़ाता है।

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यह जलीय जीवन के लिए हानिकारक हो सकता है। औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि रसायनों और अपशिष्ट जल से कार्बनिक पदार्थ पानी में प्रवेश करते हैं जिससे सीओडी बढ़ जाती है। सीओडी बढ़ने से बीओडी की मात्रा भी बढ़ती है। नजफगढ़ और अबुल फजल को छोड़कर अन्य नालों के पानी में कुल निलंबित ठोस (टीएसएस) की मात्रा भी मानक (100 एमजी प्रति लीटर) से अधिक है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ नालों से गाद निकालने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इनमें मिलने वाले सीवरेज और औद्योगिक अपशिष्ट की समस्या दूर करनी होगी। इसके लिए सभी नालों के पानी को टैप कर सीवरेज उपचार संयंत्र (एसटीपी) में ले जाकर शोधित करना होगा।

जल बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार ड्रेन प्रबंधन का काम चल रहा है। नालों का पूरे वर्ष अध्ययन कर उसे साफ करने की योजना तैयार की जाएगी। दिसंबर, 2027 तक यमुना में गिरने से पहले सभी नालों का पानी टैप कर इसे एसटीपी में उपचारित किया जाएगा।

साउथ एशिया नेटवर्क आन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल (संड्रप) के सहायक समन्वयक बीएस रावत ने कहा, डीपीसीसी की रिपोर्ट पर प्रश्न उठ रहे हैं। दो माह रोककर रिपोर्ट जारी की गई है। नालों में प्रदूषण बढ़ने का अर्थ है कि नदी साफ नहीं हो रही है।

यमुना में गिरने वाले बड़े नालों में बीओडी की स्थिति

नाला दिसंबर 2025 दिसंबर 2024
नजफगढ़ 42 78
आइएसबीटी 114 90
सेन नर्सिंग होम 128 86
पावर हाउस 80 83
इंद्रपुरी 130 77
सोनिया विहार 74 47
कैलाश नगर 112 87
शास्त्री पार्क 54 67
बारापुला 38 90
महरानी बाग 58 80
जैतपुर 70 103
सरीता विहार पुल 136 110
तुगलकाबाद 114 73
सरीता विहार के नजदीक (मथुरा रोड) 46 83
शाहदरा 128 120
साहिबाबाद 102 143
अबुल फजल 28 153

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