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दिल्ली में यमुना नदी में मूर्ति विसर्जन पर सख्ती, उल्लंघन पर लगेगा 50 हजार का जुर्माना

Published: Tue, 15 Sep 2026 08:18 PM (IST)

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने गणेशोत्सव और दुर्गा पूजा के दौरान यमुना में मूर्ति विसर्जन के लिए सख्त निर्देश जारी ...और पढ़ें

यमुना में मूर्ति विसर्जन पर दिल्ली में सख्ती, उल्लंघन पर 50 हजार का जुर्माना तय।

यमुना में मूर्ति विसर्जन पर दिल्ली में सख्ती, उल्लंघन पर 50 हजार का जुर्माना तय।

HighLights

  1. यमुना में मूर्ति विसर्जन के लिए सख्त निर्देश जारी।

  2. नियम तोड़ने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा।

  3. पीओपी मूर्तियों का विसर्जन पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। गणेशोत्सव और दुर्गा पूजा के दौरान यमुना और दूसरे जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। यमुना समेत किसी भी जलस्रोत में मूर्ति विसर्जन केवल स्थानीय निकायों द्वारा चिन्हित निर्धारित स्थानों पर ही किया जा सकेगा। नियम तोड़ने पर 50 हजार रुपये पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क देना होगा।

डीपीसीसी ने स्पष्ट किया है कि पीओपी से बनी मूर्तियों का जलस्रोतों में विसर्जन नहीं किया जाएगा। डीपीसीसी ने मूर्ति निर्माताओं और विक्रेताओं को प्राकृतिक मिट्टी, प्राकृतिक रंग और जैव-अवक्रमणीय सामग्री इस्तेमाल करने को कहा है। वहीं नगर निकायों को आवासीय इलाकों के नजदीक अस्थायी या कृत्रिम विसर्जन कुंड बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लोगों को यमुना तक मूर्तियां ले जाने की जरूरत न पड़े।

निर्देशों के मुताबिक घरों और आरडब्ल्यूए परिसर में भी बाल्टी या अस्थायी कृत्रिम कुंड में मूर्ति विसर्जन को प्रोत्साहित किया जाएगा। विसर्जन से पहले फूल और सजावटी सामग्री अलग करनी होगी। जैव-अवक्रमणीय सामग्री को कंपोस्टिंग और गैर-जैविक सामग्री को सुरक्षित निस्तारण के लिए अलग-अलग एकत्र किया जाएगा।

यमुना में पूजा सामग्री फेंकने पर भी रोक

डीपीसीसी ने यमुना में पूजा सामग्री, फूल, खाद्य सामग्री, तेल आदि डालने पर रोक से जुड़े एनजीटी के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। नगर निकायों और दिल्ली पुलिस को प्रतिबंधित मूर्तियां लेकर दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों की जांच तथा अवैध रूप से मूर्ति बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

तीन चरणों में होगी पानी की जांच

डीपीसीसी सितंबर और अक्टूबर में यमुना के पानी की गुणवत्ता की मूर्ति विसर्जन से पहले, विसर्जन के दौरान और विसर्जन के बाद जांच करेगी। सभी संबंधित एजेंसियों को इन दोनों महीनों में हर सप्ताह कार्रवाई रिपोर्ट डीपीसीसी को भेजनी होगी। निर्देशों का उल्लंघन करने पर जल अधिनियम के तहत छह साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।

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