दीवाली पर व्यापार का नया रिकॉर्ड, दिल्ली में 1 लाख करोड़ का कारोबार; देशभर में 6 लाख करोड़ के पार
दिल्ली में दिवाली का व्यापार 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है, जबकि देशभर में यह आंकड़ा 6 ...और पढ़ें
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दिल्ली में 1 लाख करोड़ का कारोबार। AI जनरेटेड इमेज
HighLights
दिल्ली में दिवाली व्यापार ने एक लाख करोड़ का आंकड़ा छुआ।
देशभर में त्योहारी कारोबार छह लाख करोड़ से अधिक पहुंचा।
'वोकल फॉर लोकल' उत्पादों को ग्राहकों ने दी भरपूर प्राथमिकता।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। यह दीवाली दिल्ली समेत पूरे देश के व्यापार जगत के लिए ऐतिहासिक साबित हुई है। दिल्ली में दीवाली का कुल व्यापार एक लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है, जबकि पूरे देश में यह कारोबार छह लाख करोड़ से भी अधिक पहुंचा है।
बाजारों में ग्राहकों के उमड़ते उत्साह को देखते हुए कारोबारी संगठनों ने इस त्यौहारी सीजन यह आंकड़ा सात लाख करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद जताई है। छठ पूजा व गुरु नानक देव जन्मोत्सव तक खरीदारी रहेगी।
यह रिकॉर्ड बिक्री का आंकड़ा तब है, जब कुछ कारोबारी संगठनों ने दिल्ली में अक्टूबर में हुए बाजारों में हुए विरोध प्रदर्शनों तथा एक नवंबर को कांग्रेस पार्टी की महारैली से त्यौहारी खरीदारी पर बुरा असर पड़ने का दावा किया था। उस बीच इस बिक्री के लिए कारोबारी संगठनों ने इसके लिए दिल्ली-एनसीआर के खरीदारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने उन तमाम बाधाओं को दरकिनार करते हुए बड़ी संख्या में बाजारों में पहुंचे और दिल खोलकर खरीदारी की।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री व चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने दिल्लीवासियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा, ‘धन्यवाद दिल्ली’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि करोड़ों व्यापारियों और छोटे उद्यमियों की सच्ची भावना है।
दिल्लीवालों ने यह साबित किया कि वे त्योहारों की खुशियों और आर्थिक गतिविधियों को किसी राजनीतिक व्यवधान के कारण रुकने नहीं देना चाहते। अपने व्यवहार और रिकॉर्ड खरीदारी से उन राजनीतिक गतिविधियों और आंदोलनों को जवाब दिया है, जिनसे उनकी आवाजाही और व्यापारियों की आजीविका प्रभावित हुई थी।
स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों की धूम
इस बार की त्योहारी खरीदारी में एक बड़ा बदलाव यह देखने को मिला कि ग्राहकों ने पूरी तरह से भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फार लोकल’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और स्वदेशी अपनाने के आह्वान का व्यापक प्रभाव बाजारों में दिखाई दे रहा है।
भारतीय कारीगरों, निर्माताओं, छोटे उद्योगों और स्थानीय उद्यमियों के उत्पादों को ग्राहकों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। कैट के अनुसार, इस बंपर कारोबार से छोटे व मझोले व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों, दिहाड़ी मजदूरों, महिला उद्यमियों, ट्रांसपोर्टर्स और पैकेजिंग उद्योग से जुड़े लाखों लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष बड़ा आर्थिक लाभ मिला है। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों के लिए बाजार मिलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं।
गुरु पर्व तक जारी रहेगी रौनक
व्यापारियों का कहना है कि भले ही पिछले एक महीने के नुकसान की भरपाई कुछ दिनों की खरीदारी से पूरी तरह संभव न हो, लेकिन इस उत्साह ने व्यापारिक जगत का मनोबल अवश्य बढ़ाया है। त्योहारों का यह सिलसिला अभी थमा नहीं है। दीपावली के बाद भी अन्नकूट, भैया दूज, छठ पूजा, तुलसी विवाह और 24 नवंबर को गुरु नानक जन्मोत्सव तक बाजारों में खरीदारी की यह रौनक बनी रहेगी।
इन क्षेत्रों में निकली है प्रमुख मांग
- सोना, चांदी और आभूषण: सोने के आभूषण, चांदी के सिक्के और मूर्तियां।
- आटोमोबाइल व दोपहिया वाहन: कारों, स्कूटरों, मोटरसाइकिलों तथा व्यावसायिक वाहनों की खरीद में रहा उत्साह।
- इलेक्ट्रानिक्स व घरेलू उपकरण: मोबाइल फोन, एलईडी टीवी, रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन और एयर कंडीशनर।
- कपड़े और फैशन: पारंपरिक परिधान, साड़ियां, सूट, रेडीमेड गारमेंट्स व बच्चों के कपड़े, पर्दे, कंबल, बेडशीट।
- पूजा व सजावटी सामग्री: मिट्टी के दीये, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, पूजन थालियां, रंगोली और लाइटिंग।
- खाद्य पदार्थ व मिठाइयां: पारंपरिक मिठाइयां, ड्राई फ्रूट्स, नमकीन और चाकलेट गिफ्ट पैक।
- फर्नीचर एवं घरेलू साज-सज्जा: फर्नीचर, होम डेकोर, किचनवेयर, बर्तन और फर्निशिंग उत्पाद।
- हस्तशिल्प व अन्य: खादी उत्पाद, हथकरघा वस्त्र और महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार वस्तुएं।
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