हुनर के आगे झुकेगी दिव्यांगता, अब AI और कंप्यूटर ट्रेनिंग से संवरेगा भविष्य; मिलेंगे रोजगार के अवसर
कड़कड़डूमा स्थित एनसीएससी-डीए में दिव्यांगजनों को एआई, डेटा विश्लेषण और कंप्यूटर एप्लीकेशन में प्रशिक्षित करने के लिए एक आधुनिक लैब शुरू की गई है।
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एआई एक्सपर्ट बनेंगे दिव्यांग। AI जनरेटेड इमेज
नीतीश कुमार, पूर्वी दिल्ली। दिव्यांगता अब हुनर और रोजगार के बीच दीवार नहीं बनेगी। आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण लेकर दिव्यांगजन भी एआई, डेटा विश्लेषण और कंप्यूटर एप्लीकेशन जैसे क्षेत्रों में करियर बना सकेंगे।
कड़कड़डूमा स्थित नेशनल करियर सर्विस सेंटर फार डिफरेंटली एबल्ड (एनसीएससी-डीए) में इसके लिए आधुनिक कंप्यूटर लैब शुरू की गई है। यहां 21 मान्यता प्राप्त दिव्यांग श्रेणियों के लोगों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के साथ संवाद कौशल और व्यक्तित्व विकास का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
रोजगार के बेहतर अवसर
खास बात यह है कि प्रशिक्षण के बाद उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने के लिए रोजगार मेले आयोजित किए जाएंगे और उन्हें कंपनियों से जोड़ा जाएगा। इस पहल का उद्देश्य दिव्यांगजनों को केवल प्रशिक्षित करना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर देकर आत्मनिर्भर बनाना है।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के रोजगार महानिदेशालय की उप महानिदेशक अंजलि रावत और उप निदेशक अनुपमा शर्मा ने मंगलवार को केंद्र में आधुनिक कंप्यूटर लैब का उद्घाटन किया।
आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराईं
अधिकारियों ने बताया कि इस पहल को क्वालकाम, निर्माण संगठन और एनसीएससी-डीए ने संयुक्त रूप से सीएसआर परियोजना समर्थ के तहत शुरू किया है। क्वालकाम कंपनी के सहयोग से तैयार की गई इस लैब में तकनीकी प्रशिक्षण के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यहां 30 लैपटॉप, 100 इंच का स्मार्ट बोर्ड, इंटरनेट कनेक्टिविटी और प्रशिक्षुओं के लिए अलग-अलग कार्यस्थल बनाए गए हैं।
दिव्यांगजनों को कंप्यूटर का ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक कार्यक्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। प्रशिक्षण के दौरान तकनीकी दक्षता के साथ संवाद कौशल और व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे प्रशिक्षुओं को नौकरी के लिए जरूरी कौशल विकसित करने और कार्यस्थल पर अपनी क्षमता साबित करने में मदद मिलेगी।
प्रशिक्षण से रोजगार तक का रास्ता
केंद्र के प्रमुख गौतम कुमार मुखर्जी ने बताया कि इस व्यव्स्था से सुनने और बोलने में कठिनाई वाले प्रशिक्षुओं सहित अन्य दिव्यांगजनों को प्रशिक्षण के दौरान संवाद करने, अपनी समस्याएं साझा करने और मार्गदर्शन के लिए केंद्र में सहयोगी कर्मचारियों की भी नियुक्ति की गई है। यहां एक साफ्ट स्किल प्रशिक्षक, संकेत भाषा दुभाषिया, एक परामर्शदाता और दो मोबिलाइजर की व्यवस्था की गई है।
केंद्र के पुनर्वास अधिकारी मनोज कालपांडे ने बताया कि प्रशिक्षण के साथ उम्मीदवारों को रोजगार से जोड़ने की व्यवस्था भी की गई है।
प्रशिक्षुओं को तकनीकी ज्ञान के अलावा संवाद कौशल और व्यक्तित्व विकास का प्रशिक्षण देने साथ ही केंद्र में नियमित रूप से रोजगार मेला का आयोजन कर प्रशिक्षित उम्मीदवारों को कंपनियों तक पहुंचाने और उनके लिए नौकरी पाने में भी सहयोग किया जाएगा।
