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दिल्ली की अदालतों में 3 लाख मुकदमे लंबित, LG ने अभियोजन निदेशालय की ली समीक्षा बैठक, दिए कई निर्देश

Published: Mon, 19 Oct 2026 07:45 PM (IST)

दिल्ली की जिला अदालतों में 3 लाख से अधिक मुकदमे लंबित हैं और अभियोजन निदेशालय में 216 पद खाली हैं, ...और पढ़ें

एलजी तरनजीत सिंह संधू, जागरण आर्काइव।

एलजी तरनजीत सिंह संधू, जागरण आर्काइव।

HighLights

  1. दिल्ली अदालतों में 3.02 लाख मुकदमे लंबित, न्याय में देरी।

  2. अभियोजन निदेशालय में 216 पद खाली, कार्यभार बढ़ा।

  3. एलजी ने न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली की जिला अदालतों में 3.02 लाख मुकदमों का लंबित होना और अभियोजन निदेशालय में बड़ी संख्या में पद खाली रहना न्यायिक प्रक्रिया की गति पर सवाल खड़े कर रहा है।

एलजी तरनजीत सिंह संधू ने सोमवार को अभियोजन निदेशालय के कामकाज की समीक्षा करते हुए अनावश्यक तारीखों पर रोक लगाने, गवाहों की समय पर पेशी सुनिश्चित करने और मुकदमों के निपटारे में देरी की निगरानी करने के निर्देश दिए।

तीन लाख से अधिक मुकदमे लंबित

उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय में देरी को न्याय से वंचित होने की स्थिति नहीं बनने दिया जा सकता। इसके लिए अभियोजन, दिल्ली पुलिस और फोरेंसिक प्रयोगशालाओं के बीच बेहतर समन्वय के साथ जवाबदेही तय करनी होगी। समीक्षा बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक दिल्ली की जिला अदालतों में कुल 3,02,477 विचाराधीन मुकदमे लंबित थे।

इनमें 2,54,597 मामले मजिस्ट्रेट अदालतों और 47,880 मामले सत्र अदालतों में लंबित हैं। एलजी ने कम दोषसिद्धि दर, मुकदमों के धीमे निपटारे और लगातार बढ़ते लंबित मामलों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 के तहत निर्धारित समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने और देरी के कारणों की नियमित निगरानी करने को कहा।

एक अभियोजक पर 3065 तक मुकदमों का बोझ

बैठक में अभियोजकों पर काम के भारी दबाव का मुद्दा भी सामने आया। सत्र अदालतों में तैनात 155 लोक अभियोजक और अतिरिक्त लोक अभियोजक औसतन 309 लंबित मामलों को संभाल रहे हैं।

रोहिणी में यह औसत बढ़कर 627 मामलों तक पहुंच गया है। वहीं, मजिस्ट्रेट अदालतों में तैनात 126 अतिरिक्त लोक अभियोजक और सहायक लोक अभियोजक औसतन 2,021 लंबित मामलों को संभाल रहे हैं। रोहिणी में एक अभियोजक के जिम्मे औसतन 3,065 लंबित मामले हैं।

स्वीकृत पदों में 216 खाली

लोक अभियोजक, अतिरिक्त लोक अभियोजक और सहायक लोक अभियोजक के कुल 507 स्वीकृत पदों में से 216 खाली हैं। सहायक कर्मचारियों के 71 स्वीकृत पदों में से 42 रिक्त हैं।

एलजी ने कर्मचारियों की नियुक्ति में देरी और अदालतों में पर्याप्त कक्ष उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए यूपीएससी और अदालतों में कक्षों सहित जरूरी सुविधाओं की कमी दूर करने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से बात करेंगे।

दोषमुक्ति के मामलों की होगी समीक्षा

एलजी ने अभियोजन पक्ष को आरोपपत्रों और साक्ष्यों की गहन जांच करने तथा जांच अधिकारियों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में आरोपित दोषमुक्त होते हैं, उनका विश्लेषण कर जांच और अभियोजन की कमियों की पहचान की जाए और सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।

बैठक में बताया गया कि आपराधिक मामलों में दोषमुक्ति के आदेशों की समीक्षा के लिए गठित स्थायी समिति अगस्त 2014 से अब तक 34 बैठकों में 64,210 मामलों पर विचार कर चुकी है।

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