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कार की सही मरम्मत न करना पड़ा महंगा, दिल्ली कोर्ट ने सर्विस सेंटर को फ्री रिपेयरिंग और 50 हजार देने का दिया आदेश

Published: Mon, 19 Oct 2026 04:17 PM (IST)

दिल्ली उपभोक्ता आयोग ने एक कार सर्विस सेंटर को सेवा में कमी के लिए दोषी मानते हुए आदेश जारी किया ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

HighLights

  1. उपभोक्ता आयोग ने कार सर्विस सेंटर को सेवा में कमी का दोषी पाया।

  2. निसान कार की मरम्मत मुफ्त करने और मुआवजा देने का आदेश।

  3. सर्विस सेंटर को 45 दिनों में आदेश का पालन करना होगा।

डिजिटल डेस्क, जागरण। कंज्यूमर यानी उपभोक्ता अगर अपने हक के बारे में सही तरीके से जान लें तो उन्हें इसका फायदा मिलता रहेगा। इस बात का एक नया उदाहरण सामने आया है। दिल्ली के एक उपभोक्ता आयोग ने एक मामले पर सुनवाई करते हुए एक कार सर्विस सेंटर को सेवा में कमी के लिए दोषी ठहराते हुए, उपभोक्ता को राहत दी है।

यह मामला एक निसान कार से जुड़ा है, उपभोक्ता का कहना था कि जलभराव की वजह से उनकी कार आंशिक रूप से पानी में डूब गई थी। जिसके बाद उन्होंने इसे ठीक करने के लिए एक सर्विस सेंटर में भेजा। जहां उनकी कार को ठीक करने के बजाय और खराब कर दिया गया।

एक महीने के अंदर गाड़ी में आई दोबारा खराबी

उपभोक्ता का कहना है कि कार सर्विस सेंटर में देने के बाद भी ठीक नहीं हुई और जब वापस मिली तो एक महीने के अंदर ही इसके गियरबॉक्स में भी खराबी आ गई। इसके बाद उपभोक्ता ने दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत की। इस मामले पर आयोग ने सुनवाई करने के बाद 6 अक्टूबर 2026 को अधिकृत सर्विस सेंटर को निर्देश दिया कि उनकी गाड़ी को मुफ्त में ठीक किया जाए और उसके लिए कोई भी फीस न ली जाए।

आयोग ने सर्विस सेंटर को दिया सख्त निर्देश

आयोग ने सर्विस सेंटर को इसके साथ-साथ उपभोक्ता को होने वाली मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च के मुआवजे के तौर पर 50 हजार रुपये का भी भुगतान करने का निर्देश दिया। आयोग द्वारा जारी किए गए आदेश के मुताबिक शिकायतकर्ता एक सेना का अधिकारी बताया जा रहा है। उनका कहना है कि सर्विस सेंटर वालों ने उनकी अनुमति के बिना बीमा पॉलिसी में कवर न होने वाले पार्ट्स को भी बदल दिया।

45 दिनों के अंदर गाड़ी ठीक करवाने का निर्देश

उन्होंने आयोग में जाने से पहले दूसरी पार्टी को कानूनी नोटिस भी भिजवाया था, हालांकि इसके बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। जिसके बाद उन्होंने आयोग से मदद मांगी। जहां बेंच की ओर से कहा गया कि एक महीने के अंदर गाड़ी में दोबारा खराबी आने का मतलब साफ है कि इसे ठीक से बनाया ही नहीं गया है। इस आदेश का 45 दिनों के अंदर पालन करने के भी निर्देश दिए गए हैं और ऐसा नहीं करने पर मुआवजे की रकम और ज्यादा बढ़ सकती है।

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