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दिल्ली श्रमिक स्वास्थ्य योजना से प्राइवेट कंपनियां बाहर, पुरानी गड़बड़ियों के बाद अब सिर्फ PSU को मिलेगा टेंडर

Published: Tue, 20 Oct 2026 11:29 AM (IST)

दिल्ली भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड की स्वास्थ्य योजना में अब केवल सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ही आवेदन ...और पढ़ें

कैग रिपोर्ट में गड़बड़ी के खुलासे के बाद बोर्ड सख्त

कैग रिपोर्ट में गड़बड़ी के खुलासे के बाद बोर्ड सख्त

HighLights

  1. निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य योजना में अब केवल पीएसयू।

  2. निजी कंपनियों को आवेदन से बाहर रखा गया।

  3. पूर्व की गड़बड़ियों के अनुभवों से लिया गया निर्णय।

वी के शुक्ला, नई दिल्ली। पूर्व के गड़बड़ी के अनुभवों को देखते हुए दिल्ली भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड की निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य योजना में अब केवल सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) ही पात्र होंगे। पीएसयू ही आवेदन कर सकेंगे।

बोर्ड ने कार्यान्वयन एजेंसी के चयन संबंधी निविदा पर स्पष्टीकरण जारी किया है। एजेंसी के पास स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में निर्धारित अनुभव होना अनिवार्य है। निजी कंपनियों के साथ गठबंधन कर संयुक्त रूप से आवेदन करने की अनुमति नहीं होगी। एजेंसी को पात्रता की सभी शर्तें स्वयं पूरी करनी होंगी।

निविदा में भाग लेने की अनुमति नहीं

निविदा की प्रमुख शर्त यह है कि योजना लागू करने वाली एजेंसी सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम होनी चाहिए। उसके पास स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में निर्धारित अनुभव होना भी जरूरी है। निजी कंपनियों के साथ मिलकर संयुक्त समूह बनाकर निविदा में भाग लेने की अनुमति नहीं दी गई है। इस शर्त के कारण निजी कंपनियां स्वतंत्र रूप से या किसी सरकारी उपक्रम के साथ समूह बनाकर इस कार्य के लिए पात्र नहीं होंगी।

निविदा में दूसरी महत्वपूर्ण शर्त जुर्माने से संबंधित है। एक ही चूक के लिए सेवा-स्तर संबंधी शर्तों और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के नियमों के तहत दोहरा जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। हालांकि, अलग-अलग मानकों के उल्लंघन पर अलग कार्रवाई हो सकेगी। एक ही चूक दोनों प्रविधानों के दायरे में आने पर अधिक जुर्माना लागू होगा।

निजी कंपनियों को बाहर रखने की वजह क्या है?

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को प्राथमिकता देने के पीछे संभावित उद्देश्य एजेंसी की जवाबदेही, वित्तीय क्षमता और बड़े स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन का अनुभव सुनिश्चित करना हो सकता है। हालांकि, बोर्ड ने निजी कंपनियों को अपात्र रखने के पीछे कोई विशेष कारण बताया है या नहीं, इसकी पुष्टि उपलब्ध स्पष्टीकरण से नहीं होती। इसलिए इसे किसी निजी कंपनी की पिछली गड़बड़ी का परिणाम मानना उचित नहीं होगा।

बोर्ड में पूर्व में अन्य मामलों में हो चुकी है गड़बड़ी

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के अनुसार 6.96 लाख पंजीकृत श्रमिकों का दावा किया, लेकिन केवल 1.98 लाख श्रमिकों का पूरा आंकड़ा उपलब्ध कराया। इनमें भी 1.19 लाख लाभार्थियों के साथ 2.38 लाख तस्वीरें जुड़ी मिलीं। इसी तरह वर्ष 2019-20 से 2022-23 के दौरान 17 में से 12 से कम योजनाओं के तहत ही लाभ दिए जा सके। वर्ष 2020 की रिपोर्ट में आयकर और ब्याज के रूप में 97.64 करोड़ रुपये के भुगतान का उल्लेख किया गया था।

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