दिल्ली में जमीन और मकान खरीदाना होगा महंगा, रेजिडेंशियल 12 और कृषि सर्किल रेट 18 साल बाद बढ़ाने की तैयारी
दिल्ली में 18 साल बाद कृषि भूमि और 12 साल बाद आवासीय संपत्तियों के सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी है। ...और पढ़ें

दिल्ली में सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी। फोटो: सांकेतिक
वी के शुक्ला, नई दिल्ली। दिल्ली में करीब 18 साल बाद कृषि भूमि और 12 साल बाद आवासीय संपत्तियों के सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी है। सरकार इलाके और जमीन की स्थिति के अनुसार नई दरें निर्धारित करने पर विचार कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, कृषि भूमि का सर्किल रेट ढाई से पांच करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक तय किए जाने की संभावना है। वहीं, आवासीय संपत्तियों की दरों में अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार 10 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।
कृषि भूमि का सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी
दिल्ली के किसान लंबे समय से कृषि भूमि का सर्किल रेट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2008 के बाद से दरों में बदलाव नहीं हुआ, जबकि इस दौरान जमीन की कीमतों और महंगाई में काफी वृद्धि हुई है।
किसान सर्किल रेट को बढ़ाकर साढ़े आठ से 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक करने की मांग कर रहे हैं। बाहरी और पश्चिमी दिल्ली के कई गांवों में किसान नई दरें लागू होने के बाद ही सरकारी योजनाओं के लिए जमीन देने की बात कह रहे हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जून 2025 में सर्किल रेट की समीक्षा के लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। इसके बाद अक्टूबर 2025 के पहले सप्ताह में सरकार ने आम जनता, आरडब्ल्यूए और किसानों से 15 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं।
तय समयसीमा 15 अक्टूबर 2025 को समाप्त हो गई थी। समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है और इस मुद्दे पर कई बैठकें भी हो चुकी हैं।
दिल्ली में 200 से अधिक गांवों में खेती होने का अनुमान है। जानकारों के मुताबिक, यहां 50 हजार एकड़ से ज्यादा भूमि पर कृषि गतिविधियां जारी हैं। ऐसे में नई दरों का असर किसानों के मुआवजे और जमीन से जुड़े अन्य मामलों पर भी पड़ सकता है।
कॉलोनियों के हिसाब से तय होंगी नई दरें
आवासीय संपत्तियों के सर्किल रेट में बदलाव से संपत्ति की खरीद-बिक्री महंगी हो सकती है। सर्किल रेट बढ़ने पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क में भी बढ़ोतरी होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में एक ही श्रेणी की कई कॉलोनियों के सर्किल रेट समान हैं, जबकि उनकी बाजार कीमतों में काफी अंतर है। नई व्यवस्था में इस असमानता को दूर करने के लिए एक श्रेणी के भीतर दो से तीन उपश्रेणियां बनाने पर विचार किया जा रहा है।
बी से ई श्रेणी में ज्यादा बढ़ोतरी का प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार, बी, सी, डी और ई श्रेणी की संपत्तियों के सर्किल रेट में अपेक्षाकृत ज्यादा बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। लुटियंस दिल्ली जैसी अति-प्रीमियम कॉलोनियों के लिए ए-प्लस श्रेणी बनाई जा सकती है, जबकि एच श्रेणी में अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी की संभावना है।
वर्तमान आवासीय सर्किल रेट (प्रति वर्ग मीटर)
श्रेणी | सर्किल रेट |
|---|---|
ए श्रेणी | 7,74,000 रुपये |
बी श्रेणी | 2,45,520 रुपये |
सी श्रेणी | 1,59,840 रुपये |
डी श्रेणी | 1,27,680 रुपये |
ई श्रेणी | 70,080 रुपये |
एफ श्रेणी | 56,640 रुपये |
जी श्रेणी | 46,200 रुपये |
एच श्रेणी | 23,280 रुपये |
