POCSO से लेकर बाल श्रम तक, दिल्ली बाल आयोग के सामने 3 माह में आए 377 मामले; 56 केस में लिया स्वत: संज्ञान
दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग को पुनर्गठन के बाद जुलाई से सितंबर के बीच 377 शिकायतें मिलीं, जिनमें 38 पॉक्सो ...और पढ़ें

कश्मीरी गेट स्थित डीसीपीसीआर मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बाल सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं और शिकायतों पर जानकारी देते आयोग के अध्यक्ष डाॅ. ओपी व्यास और सदस्य स्वाति गुप्ता, कुंदन कांस्कर और राहुल गौतम। जागरण
HighLights
पुनर्गठन के बाद डीसीपीसीआर को तीन माह में 377 शिकायतें मिलीं।
इनमें 38 पॉक्सो और 206 शिक्षा के अधिकार से संबंधित मामले।
आयोग ने बाल सुरक्षा और जागरूकता के लिए कई पहलें शुरू कीं।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) के पुनर्गठन के बाद जुलाई से सितंबर महीने के दौरान आयोग को कुल 377 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। आयोग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इसमें पोक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत दर्ज 38 मामले भी शामिल हैं।
विभागवार शिकायतों का आंकड़ा
आयोग को मिली कुल 377 शिकायतों में सबसे अधिक मामले शिक्षा के अधिकार (आरटीई) से जुड़े हैं। इसके अलावा, आयोग ने विभिन्न मामलों में 56 बार स्वतः संज्ञान भी लिया है। शेष आंकड़े मामले की गंभीरता की ओर इशारा कर रहे हैं...
| शिक्षा का अधिकार | 206 शिकायतें |
| किशोर न्याय | 87 शिकायतें |
| पोक्सो मामले | 38 शिकायतें |
| लापता बच्चे | 17 शिकायतें |
| बाल श्रम | 16 शिकायतें |
| स्वास्थ्य एवं पोषण | 13 शिकायतें |
गंभीर मामलों पर कार्रवाई और पोक्सो जागरूकता अभियान
डीसीपीसीआर अध्यक्ष ओम प्रकाश व्यास ने बताया कि आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में आयोग ने संबंधित पुलिस उपायुक्त को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।
इसके साथ ही, आयोग दिल्लीभर में बच्चों, अभिभावकों और स्कूल कर्मचारियों के लिए पोक्सो जागरूकता अभियान चला रहा है। इस अभियान का मुख्य ध्यान 'सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श', अपराधों की रिपोर्टिंग और मानसिक स्वास्थ्य परामर्श पर है। आयोग ने उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और एमसीडी महापौर से स्कूलों में नियमित और अनिवार्य आत्मरक्षा कक्षाएं शुरू करने का भी आग्रह किया है।
'भीख नहीं सीख' पहल और नई हेल्पलाइन की शुरुआत
डीसीपीसीआर सदस्य स्वाति गुप्ता ने बताया कि आयोग की 'बाल भिक्षावृत्ति मुक्त दिल्ली' पहल के तहत बच्चों के बचाव, देखभाल, भावनात्मक पुनर्वास और उन्हें शिक्षा व रोजगार से जोड़ने का काम किया जा रहा है। इस अभियान के प्रसार के लिए एक शुभंकर, जिंगल्स, लोगो और "भीख नहीं सीख" का नारा तैयार किया गया है, जिसे एक महीने के भीतर आधिकारिक रूप से लॉन्च किया जाएगा।
जिलों के अनुसार शिकायतों का विवरण
दिल्ली के अलग-अलग जिलों से प्राप्त शिकायतों का आंकड़ा इस प्रकार है...
| उत्तर-पश्चिम जिला | 61 (सर्वाधिक) |
| दक्षिण-पश्चिम जिला | 41 |
| दक्षिण जिला | 41 |
| उत्तर-पूर्व जिला | 38 |
| पूर्वी जिला | 35 |
| पश्चिम जिला | 34 |
| उत्तर जिला | 30 |
| मध्य जिला | 25 |
| दक्षिण-पूर्व जिला | 24 |
| अन्य विविध मामले | 22 |
तीन साल बाद हुआ था आयोग का पुनर्गठन
गौरतलब है कि लगभग तीन वर्षों तक पद खाली रहने के बाद जुलाई में दिल्ली सरकार ने डीसीपीसीआर का पुनर्गठन किया था। इसमें ओम प्रकाश व्यास को अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, जबकि राहुल गौतम, कुंदन कंसकार, स्वाति गुप्ता और मोनिका शर्मा को आयोग के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था। इसके साथ ही, बच्चों और अभिभावकों की सुविधा के लिए मंगलवार को एक बाल शिकायत हेल्पलाइन (9220999390) भी शुरू की गई है।
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